Source: indiatimes
ऐसे समय में जब पूरी दुनिया से लोगों के लुटने की ख़बरें आ रही हैं. हर जगह लोग जालसाजी और ज़हरखुरानी का शिकार हो रहे हैं. ठीक उसी समय कुछ ऐसी भी ख़बरें आती हैं, जो लू के थपेड़ों के बीच बारिश की फुहार की तरह आती हैं.
जयपुर की सड़कों पर रिक्शा खींचने वाला एक शख़्स, जो पूरी दिन की कड़ी मेहनत के बाद बमुश्किल 200 से 300 रुपये कमा पाता है. आबिद क़ुरैशी नामक इस शख़्स के पास ऐसे सारे मौके थे कि वह आराम से 1.17 लाख की धनराशि को ख़ुद के पास रख लेता. मगर आबिद ने ये सारे रुपये जो उसे गवर्नमेंट हॉस्टल सर्किल के नज़दीक मिले थे, को पहले-पहल एक सामाजिक कार्यकर्ता और फिर पुलिस कमीश्नर के मार्फ़त लौटा दिए.
जयपुर की सड़कों पर रिक्शा खींचने वाला एक शख़्स, जो पूरी दिन की कड़ी मेहनत के बाद बमुश्किल 200 से 300 रुपये कमा पाता है. आबिद क़ुरैशी नामक इस शख़्स के पास ऐसे सारे मौके थे कि वह आराम से 1.17 लाख की धनराशि को ख़ुद के पास रख लेता. मगर आबिद ने ये सारे रुपये जो उसे गवर्नमेंट हॉस्टल सर्किल के नज़दीक मिले थे, को पहले-पहल एक सामाजिक कार्यकर्ता और फिर पुलिस कमीश्नर के मार्फ़त लौटा दिए.
पुलिस कमीश्नर ने आबिद के इस कृत्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि, आबिद ने पूरी दुनिया के समक्ष नज़ीर पेश की है कि, लोग धन-सम्पदा से अमीर नहीं होते बल्कि बड़े दिल से बड़े होते हैं.
आबिद से जब लोगों और पत्रकारों ने पूछा कि, क्या तुम्हारा मन इन रुपयों को रखने का नहीं हुआ? आबिद ने कहा, “ईमानदारी सबसे बड़ी नियामत है साब”. साथ ही उसने कहा कि सिर्फ़ ईमानदार लोगों को ही जन्न्त नसीब होती है. आबिद बताता है कि वह जब शाम को 4 बजे एक किराना स्टोर के नज़दीक से गुजर रहा था तो, वहां उसे यह रुपयों से भरा प्लास्टिक बैग मिला. वो वहां इसके मालिक का रात 10 बजे तक इंतज़ार करता रहा, मगर जब कोई नहीं आया तो वह इन रुपयों को लेकर अपनी बीबी के पास लौटा. उसकी पत्नी ने भी इन रुपयों को वाजिब हक़दार तक पहुंचाने की बात कही. तब वह इलाके के शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता साबिर क़ुरैशी से मिला, और उन्हें सारा मामला बताया.
आबिद से जब लोगों और पत्रकारों ने पूछा कि, क्या तुम्हारा मन इन रुपयों को रखने का नहीं हुआ? आबिद ने कहा, “ईमानदारी सबसे बड़ी नियामत है साब”. साथ ही उसने कहा कि सिर्फ़ ईमानदार लोगों को ही जन्न्त नसीब होती है. आबिद बताता है कि वह जब शाम को 4 बजे एक किराना स्टोर के नज़दीक से गुजर रहा था तो, वहां उसे यह रुपयों से भरा प्लास्टिक बैग मिला. वो वहां इसके मालिक का रात 10 बजे तक इंतज़ार करता रहा, मगर जब कोई नहीं आया तो वह इन रुपयों को लेकर अपनी बीबी के पास लौटा. उसकी पत्नी ने भी इन रुपयों को वाजिब हक़दार तक पहुंचाने की बात कही. तब वह इलाके के शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता साबिर क़ुरैशी से मिला, और उन्हें सारा मामला बताया.
कोतवाली पुलिस स्टेशन जहां आबिद ने पूरी धनराशि लौटायी. वहां के पुलिस फोर्स का कहना है कि, इस व्यक्ति मुफ़लिसी में भी जो कर दिखाया है, वैसा बड़े-बड़े नहीं कर पाते. पुलिस ने यह भी कहा कि, वे कोशिश करेंगे कि, इस स्वतंत्रता दिवस वे आबिद को सम्मानित करने की सोच रहे हैं.
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