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ईसबगोल के फायदे और इसका सही इस्तेमाल

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
आधुनिक इलाज के दौर में 'ईसबगोल' का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। पाचन तंत्र से संबंधित समस्याओं में दवा के रूप में इसका इस्तेमाल हो रहा है। यह लगभग तीन फुट ऊंचे पौधे का बीज होता है। यह बीजों के ऊपर सफेद भूसी होती है। ईसबगोल के बीजों एवं भूसी में काफी मात्रा में म्युसिलेज पाया जाता है जिसके अंदर मुख्य रूप से जाईलोज, एरेविनोज रैमन्नोज और गैलेक्टोज आदि पाए जाते हैं। अतिसार, पेचिश जैसे पेट की समस्याओं में 'ईसबगोल' की भूसी का इस्तेमाल किया जाता है, इसकी खासियत यह है कि इसका साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।
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ईसबगोल के सेवन से लाभ

कब्ज, दस्त, जोड़ों के दर्द, मल में रक्त, पाचनतंत्र संबंधी गड़बड़ी, शरीर में पानी की कमी, मोटापा व डायबिटीज में ईसबगोल काफी फायदेमंद होता है। जोड़ों के दर्द, कब्ज व पाचनतंत्र को दुरूस्त करने के लिए रात के खाने के बाद एक गिलास गर्म दूध के साथ एक चम्मच ईसबगोल की भूसी लेने से लाभ होता है। दस्त के दौरान रक्तस्राव हो या लंबे समय से कब्ज हो तो आधा कप पानी के साथ इसकी भूसी लें। 20 मिलिलीटर की मात्रा में एक गिलास पानी में मिला लें और एक चम्मच ईसबगोल के बीज साथ में लें। इससे आंतों में होने वाली रूकावट व संक्रमण दूर होता है। 
Isabgoal in hindi

ईसबगोल के इस्तेमाल का तरीका

ईसबगोल की भूसी का असर होने में 10-12 घंटे लग जाते हैं, इसलिए शाम को छह बजे के करीब लेंगे तो सुबह समय से मोशन हो सकेगा। जब कब्ज ठीक हो जाए, तो यह प्रयोग बंद कर दें। आधे ग्लास पानी में एक चम्मच 5 मिनट तक भिगो कर पी लें और इस के बाद एक ग्लास पानी और पी लें। इसे खाने के 1 घंटे बाद लेना बेहतर है। वजन घटाने के लिए दिन में 3 बार खाने से आधा घंटा पहले लेना उचित है। दमा की शिकायत में सुबह-शाम दो-दो चम्मच ईसबगोल की भूसी गर्म पानी के साथ लेने से यह शिकायत दूर हो जाती है। 

ईसबगोल के बीजों को लेना हो तो इन्हें पीसना नहीं चाहिए। ईसबगोल के बीज शांतिदायक और शीतल होते हैं। इनसे पेट की अनावश्यक गर्मी दूर होती है।

एसिडिटी के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक नुस्‍खा है मुलेठी

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
मुलेठी ऐसी औषधि है जिसका प्रयोग अक्‍सर आप गले में खराश हो, खांसी, आदि के लिए करते हैं। इसके अलावा भी मुलेठी में कई ऐसे गुण हैं, जो पेट की समस्‍या से निजात दिलाते हैं। मुलेठी के प्रयोग करने से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर के लिए फायदेमंद है। इसका पौधा 1 से 6 फुट तक होता है। यह स्‍वाद में मीठी होती है इसलिए इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। सूखने पर इसका स्‍वाद अम्‍लीय हो जाता है। मुलेठी की जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं। इसका औषधि के रूप में प्रयोग बहुत पहले से होता आया है। इस लेख में विस्‍तार से जानिये मुलेठी के सेवन से एसिडिटी में किस तरह फायदा होता है।
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बहुत फायदेमंद है मुलेठी

मुलेठी को बहुत गुणकारी औषधि माना जाता है। मुलेठी के प्रयोग करने से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर के विकार भी दूर हो जाते हैं। मुलेठी पेट के रोग, सांस संबंधी रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों को दूर करती है। ताजी मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिन एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है। 

क्‍या है एसिडिटी

यह पेट से संबंधित समस्‍या है। जो हम खाना खाते हैं, उसका सही तरह से पचना ज़रूरी होता है। पाचन की प्रक्रिया में हमारा पेट एक ऐसे एसिड को स्रावित करता है जो खाने को सही तरीके से पचाने के लिए बहुत जरूरी होता है। पर कई बार यह एसिड आवश्यकता से अधिक मात्रा में स्रावित होता है, जिसके फलस्‍वरूप सीने में जलन और फैरिंक्स और पेट के बीच के रास्‍ते में पीड़ा और परेशानी का एहसास होता है। इस हालत को एसिडिटी या एसिड पेप्टिक रोग के नाम से जाना जाता है। 

खान पान में अनियमितता, ठीक तरह से खाने को नहीं चबाना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना आदि कारणों से एसिडिटी की समस्‍या होती है। मसालेदार और जंक आहार का सेवन करना भी एसिडिटी के अन्य कारण होते हैं। इसके अलावा हड़बड़ी में खाना और तनावग्रस्त होकर खाने के कारण भी एसिडिटी की समस्‍या होती है। धूम्रपान और शराब का सेवन भी पेट की इस समस्या का कारण बन सकता है।
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एसिडिटी में फायदेमंद है मुलेठी

मुलेटी पेट की समस्‍याओं को दूर करने के लिए बहुत ही प्रभावी है। इसके सेवन से पेट की कई प्रकार की समस्‍याओं का उपचार हो जाता है। दरअसल मुलेठी में  ग्लिसराइजिन (glycyrrhizin) कंपाउंड पाया जाता है जो ब्‍लड के पीएच के स्‍तर को कम करने में मदद करता है। इससे पेट में हलचल, पेट में सूजन और सीने में जलन की समस्‍या दूर होती है। यह खाने को पचाने में मदद करता है जिससे एसिडिटी की समस्‍या नहीं होती। 

कैसे करें इसका सेवन

एक दिन में 10 ग्राम मुलेठी का सेवन फायदेमंद माना जाता है। सुबह के वक्‍त हल्‍के गरम पानी या दूध के साथ मुलेठी का सेवन करने से एसिडिटी के साथ दूसरी पाचन संबंधी समस्‍यायें नहीं होती हैं। 

एसिडिटीज से बचने के लिए स्‍वस्‍थ खानपान की आदतों को अपनाना बहुत जरूरी है। हरी सब्‍जी और ताजे फलों का सेवन करने के साथ नियमित व्‍यायाम करने से पेट की समस्‍यायें नहीं होती हैं। 

विभिन्‍न तरह से प्रयोग कर सकते हैं तुलसी के पत्‍ते

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
तुलसी का धार्मिक ही नहीं बल्कि औषधीय महत्व भी हैं। कहते हैं जिस घर के आंगन में तुलसी का पौधा होता हैं वह परिवार स्वस्थ और खुशहाल रहता हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि तुलसी का महत्व हमारे किचन में भी है। एशियाई और मेडिटेरेनयन खाने में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पत्तों की खुशबु खाने में गजब का स्‍वाद लाती है। पास्ता, पिज्जा, करी, सूप, सॉसेज और सलाद में यह आपका अजब सा जादू बिखेरता है।
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बेसिल यानी तुलसी कई तरह की होती हैं। स्वीट बेसिल, थाई बेसिल, लेमन बेसिल, पर्पल बेसिल और सिनासन बेसिल। तुलसी सलाद, सैंडविच, सूप और दूसरी कई रेसिपी में गजब का फ्लेवर बनाती है। अगर आपके पास ताजे बेसिल के पत्ते न हो तो आप सूखी पत्तियां भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर जहां तक हो सके हमेशा तुलसी के ताजे पत्ते का इस्तेमाल करें। आइए जानें अद्भुत तुलसी के पत्तों का विभिन्‍न तरीके से कैसे उपयोग कर सकते हैं। 

सलाद में इस्‍तेमाल

तुलसी के पत्‍तों का इस्‍तेमाल आप सलाद में भी कर सकते हैं। सलाद पर ऊपर से छिड़ककर आप मुंह में एक ताजे स्वाद का आनंद उठा सकते हैं। इससे सलाद खाने और दिखने दोनों में अच्छा हो जाता हैं क्योंकि ऊपर डाले गये तेल में भी बेसिल का एक गहरा स्वाद आ जाता है और उसका रंग भी हल्का सा हरा हो जाता है।

पास्‍ता का लुत्‍फ उठायें

आपने पास्ता का काफी बार लुत्फ उठाया होगा, पर क्या आपको पता है कि वह क्या चीज है जो पेस्तो सॉस को उसका स्वाद प्रदान करता है? जी हां पेस्‍तो सॉस में मुख्य रूप से ताजा बेसिल के पत्तों और चिलगोजे से बनता है। इसके स्वाद को बेहतर बनाने के लिये इसमें पार्मेजान चीज और ऑलिव ऑयल भी डाला जाता है। पेस्‍तो सॉस बनाने के लिए बेसिल के पत्तों को केवल थोड़े से चिलगोज, लहसुन की कलियां और ऑलिव ऑयल के साथ पीस लें।
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सूप में लें इसका मजा

क्रीम ऑफ टमॅटो सूप में ताजे बेसिल के पत्ते मिलाने इसे अनोखा स्वाद मिलता है। यह सूप को और भी खूशबुसार और स्वादिष्ट बनाता है। तो अगली बार सूप का मजा अच्‍छे से लेने के लिए अपने सूप में ताजे बेसिल के पत्‍तों को मिलाना न भूलें। 

तुलसी की हर्बल चाय

तुलसी को चाय में डालकर आप हर्बल चाय बना सकते हैं। यह चाय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। इससे इम्युनिटी बढ़ती है, त्वचा रोग दूर होते हैं, कफ, खांसी व जुकाम में आराम मिलता है और ब्लड प्यूरीफाई होता है। एक कप चाय में तुलसी की चार पत्तियां प्रयोग में ली जा सकती हैं।


अन्‍य इस्‍तेमाल

  • बेसिल को हेल्दी स्टर-फ्राय में थाई व्यंजन का स्वाद प्रदान करने के लिए डाला जा सकता है, खासतौर पर जो बैंगन, पत्तागोभी, चिली पैपर, टोफू आदि से बनाया गया हो। इसका प्रयोग तेल में डालकर किया जाता है, जैसे स्टा-फ्राय बनाने के लिए बेसिल के तेल का प्रयोग।
  • बेसिल का प्रयोग आईस-क्रीम और चॉकलेट को स्वाद प्रदान करने के लिए भी किया जाता है। इसे दूध या क्रीम में उबालकर डेजर्ट में मिला सकते हैं।

हैंगओवर दूर करने के लिए घरेलू उपाय

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
वीकएंड हो या दोस्‍तों के साथ जश्‍न का माहौल, ड्रिंक पार्टी तो ही जाती है। ऐसे में कई बार अल्‍कोहल का ज्‍यादा सेवन करने पर हैंगओवर होना आम बात है। हैंगओवर होने पर आपको अजीब सा महसूस होता है। इसमें चक्‍कर आने के साथ ही किसी काम में मन न लगना आम बात है।

हैंगओवर दूर करने के उपाय
लंबे समय तक हैंगओवर बने रहना खतरनाक भी हो सकता है। हैंगओवर में अक्‍सर सिर में दर्द, मितली आना, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत होती है। इसलिए जरूरी है कि हैंगओवर का जल्‍द से जल्‍द उपचार करके इसे दूर किया जाएं। लंबे समय तक हैंगओवर बने रहने पर यह नुकसानदायक भी हो सकता है। इस लेख के जरिए हम आपको बता रहे हैं हैंगओवर दूर करने के घरेलू उपायों के बारे में।

सेब और केला

हैंगओवर में फल खाने से आराम मिलता है। हैंगओवर में सेब और केले सबसे ज्‍यादा फायदेमंद है। चिकित्‍सकों के मुताबिक शराब का ज्‍यादा सेवन और खाली पेट होने पर हैंगओवर की परेशानी हो जाती है। ऐसे में सेब और केला खाने पर राहत मिलती है। बनाना शेक में एक चम्‍मच शहद मिलाकर लेना भी फायदेमंद रहेगा। इससे आपके को आराम मिलेगा। केले से शरीर के लिए जरूरी मिनरल जैसे पौटेशियम भी मिलता है।

शहद

शहद आसानी से मिल जाता है, यह हैंगओवर से छुटकारा पाने का आसान और सस्‍ता घरेलू उपाय है। शहद शरीर को अल्‍कोहल से होने वाले नुकसान के साथ ही हैंगओवर को भी कम करता है। चिकित्‍सकों का मानना है कि शराब पीने के एक से डेढ़ घंटे बाद 3-4 चम्‍मच शहद लेना फायदेमंद रहता है। यदि हैंगओवर ज्‍यादा है तो शहद ज्‍यादा मात्रा में ले सकते हैं। एक कप पानी उबालकर उसमें शहद और नींबू का रस मिलाकर पीने से भी हैंगओवर में आराम मिलता है।

अदरक

हैंगओवर होने पर मितली आती है, ऐसे में अदरक फायदेमंद है। यदि आपको हैंगओवर हो रहा है तो अदरक के दो या तीन छोटे टुकड़े चबाकर खा लें। यदि ऐसा न कर सकें तो अदरक की चाय पीना भी फायदेमंद रहेगा। इसके अलावा आप अदरक के 10 से 12 टुकड़ें करके चार कप पानी में 10 मिनट तक उबालें। अब इसमें संतरे का जूस, नींबू रस और शहद मिलाएं। हैंगओवर में इसका सेवन फायदेमंद रहेगा।

पिपरमिंट

पुदीने की तरह दिखाई देने वाला पिपरमिंट बहुत ही लाभदायक जड़ी बूटी है। इसके पत्‍तों को चबाना या इसकी चाय पीने से हैंगओवर से छुटकारा मिलता है। पिपरमिंट वातहर तत्‍व भी है, पेट में गैस बनने पर भी इससे राहत मिलती है। हैंगओवर होने पर पिंपरमेंट की 3 से 5 पत्तियों को चबाएं, फायदा मिलेगा। यदि आप चाहे तो पत्तियों को पानी में उबालकर भी पी सकते हैं।

नींबू

नींबू का रस या नींबू की बनी चाय हैंगओवर होने पर आम उपचार है। नींबू हैंगओवर में तुरंत आराम देता है। हैंगओवर में बिना चीनी वाली नींबू की चाय पिए। नींबू पेट से अनचाहे तत्‍वों को भी दूर करता है। ज्‍यादा मात्रा में शराब पीने के बाद ताजे पानी में नींबू मिलाकर पीने से शुगर लेवल भी कंट्रोल रहता है।

टमाटर

टमाटर का जूस या सूप हैंगओवर में आराम देता है। हैंगओवर होने पर आप टमाटर का जूस निकालकर या इसका सूप बनाकर इसमें नींबू मिलाकर पी लें। यह आपको हैंगओवर की समस्‍या में राहत देगा।

यूं तो शराब इतनी ही पीनी चाहिए जितना आपका शरीर और मस्तिष्‍क इजाजत दे, लेकिन फिर भी अगर कभी यारों की महफिल में इस बात का अंदाजा न रहे और मस्‍ती में जरा ज्‍यादा हो जाए, तो ये उपाय अपनाकर आप उस खुमारी को दूर कर सकते हैं।

शहद और पानी से करें अपने लीवर को साफ

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
लीवर शरीर के महत्वपूर्ण अंगो में से एक है। यह हमारे पाचन तंत्र से खून को फिल्टर करता है। चयापचय, शरीर में रक्त की आपूर्ति (शरीर पोषण का मुख्य और एक मात्र आधार) और रक्तचाप से लेकर अन्य समस्त क्रियाओ के लिए सीधे रूप से जिम्मेदार और आवश्यक होता है। लीवर की सेहत को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि हमारा पूरा स्वास्थ्य इसपर निर्भर करता है। लेकिन आज की पीढ़ी स्वस्थ जीवन शैली पर ध्यान नहीं दे रही है, इस कारण से कई लोगो के लीवर के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है और लीवर अच्छे से कार्य करने में असफल है। हमारे द्वारा लिए जाने वाले कई प्रकार के विषाक्त पदार्थ है जो शरीर में लीवर की खराबी के लिए जिम्मेदार है। लेकिन शहद और पानी से आप अपने लीवर की सफाई कर सकते हैं।
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शहद और पानी

सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पीना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है, यह बात तो हम सभी जानते हैं लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि शहद को गर्म पानी के साथ लेने से लीवर को डिटॉक्‍स करने और वजन कम में मदद मिलती है और इसके नियमित सेवन से सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ-साथ यह परजीवी से पाचन तंत्र को साफ करने में मदद करता है और शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को मुक्‍त करने में मदद करता हैं। इसमें मौजूद एंटीबैक्‍टीरियल और एंटी-वायरल गुणों के कारण यह आपके शरीर की पूरी तरह से सफाई करने में मदद करता है।


लीवर के लिए शहद और पानी

अच्छे पाचन के लिए सुबह गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीना चाहिए। यह पेट को साफ करने में मदद करता है। यह लीवर में रस के उत्‍पादन को बढ़ाता है जिससे पाचन में मदद मिलती है। नींबू में मौजूद एसिड आपके पाचन तंत्र में मदद करता है और अवांछित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा शहद एक एंटीबैक्‍टीरियल के रूप में कार्य करता है और आपके शरीर में मौजूद किसी भी तरह के संक्रमण को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा गुनगुने पानी के साथ शहद का सेवन करने के अन्‍य फायदे भी है।

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कब्‍ज दूर करें

यह मिश्रण कब्‍ज के लिए तत्‍काल उपाय है। यह आंत को प्रोत्‍साहित कर मल त्‍यागने में मदद करता है। इसके अलावा यह आंत्र म्‍यूकस में बढ़ावा देता है, पेट को हाइड्रेट करता है और सूखे मल को पानी में भिगो देता है। इन सब की एक साथ मौजूदगी से मल त्‍यागने में मदद करता है।

एनर्जी लेवल बढ़ाये

शहद और गर्म पानी से शरीर में एनर्जी में भी वृद्धि होती है। शरीर में ज्यादा एनर्जी उत्पन्न होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म और कार्यप्रणाली में भी वृद्धि होती है। शहद शरीर के अंगों को ठीक से काम करने के लिए प्रेरित करता है। सुबह के समय गर्म पानी में शहद लेने से आप दिन भर ऊर्जावान बने रह सकते हैं। 

आपके संपूर्ण स्वास्थ्य का पूरा दारोमदार आपके लीवर पर टिका रहता है। सही खानपान और लाइफस्टाइल को अपनाकर अगर आप इसे सुरक्षित रखेंगे तो यह आपको सुरक्षित रखेगा। 

अजवाइन के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
भारतीय खानपान में अजवाइन का प्रयोग सदियों से होता आया है। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन पाचन को दुरुस्त रखती है। यह कफ, पेट तथा छाती का दर्द और कृमि रोग में फायदेमंद होती है। साथ ही हिचकी, जी मचलाना, डकार, बदहजमी, मूत्र का रुकना और पथरी आदि बीमारी में भी लाभप्रद होती है।

आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन पाचक, रुचिकारक, तीक्ष्ण, गर्म, चटपटी, कड़वी और पित्तवर्द्धक होती है। पाचक औषधियों में इसका बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। अकेली अजवाइन ही सैकड़ों प्रकार के अन्न को पचाने वाली होती है। आइए हम आपको अजवाइन के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बारे में जानकारी देते हैं।
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सर्दी जुकाम में

बंद नाक या सर्दी जुकाम होने पर अजवाइन को दरदरा कूट कर महीन कपड़े में बांधकर सूंघें। सर्दी में ठंड लगने पर थोड़ी-सी अजावाइन को अच्छी तरह चबाएं और चबाने के बाद पानी के साथ निगल लें। ठंड से राहत मिलेगी।

पेट खराब होने पर

पेट खराब होने पर अजवाइन को चबाकर खाएं और एक कप गर्म पानी पीएं। पेट में कीड़े हैं तो काले नमक के साथ अजवाइन खाएं। लीवर की परेशानी है तो 3 ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक भोजन के बाद लेने से काफी लाभ होगा। पाचन तंत्र में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर मट्ठे के साथ अजवाइन लें, आराम मिलेगा।

वजन कम करें

अजवाइन मोटापे कम करने में भी उपयोगी होती है। रात में एक चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह छान कर एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीने से लाभ होता है। इसके नियमित सेवन से मोटापा कम होता है।
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मसूड़ों में सूजन


मसूड़ों में सूजन होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदों को गुनगुने पानी में डालकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है। सरसों के तेल में अजवाइन डाल कर गर्म करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर दर्द से आराम मिलेगा।

मुंह की दुर्गंध

मुंह से दुर्गध आने पर थोड़ी सी अजवाइन को पानी में उबाल लें। इस पानी से दिन में दो से तीन बार कुल्ला करने पर मुंह की दुर्गंध समाप्‍त हो जाती है।

खांसी होने पर

अजवाइन के रस में दो चुटकी काला नमक मिलाकर उसका सेवन करें और उसके बाद गर्म पानी पी लें। इससे आपकी खांसी ठीक हो जाएगी। आप काली खांसी से परेशान हैं तो जंगली अजवाइन के रस को सिरका और शहद के साथ मिलाकर दिन में 2-3 बार एक-एक चम्मच सेवन करें, राहत मिलेगी।

इसके अलावा अजवाइन कई अन्‍य रोगों में भी कारगर औषधि है।

गुर्दे की पथरी के कुछ प्राकृतिक उपाय

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
गुर्दे की पथरी एक आम बीमारी है जो अक्सर गलत खान पान की वजह से होती है। जरुरत से कम पानी पीने से भी गुर्दे की पथरी का निर्माण होता है।

लक्षण

पेशाब में जलन, मूत्र विसर्जन के समय अक्सर पीड़ा का एहसास होना , चक्कर आना, भूख मिटना, पेशाब में बदबू, पेशाब में खून  के अंश का पाया जाना इत्यादि गुर्दे की पथरी होने के कुछ आम लक्षण हैं। जिन महिलाएं को मासिक धर्म के दौरान पेट (उदर)  के निचले भाग में अक्सर दर्द की शिकायत रहती हो उन्हें भी अपनी डाक्टरी जांच अवश्य करवानी चाहिए क्योंकि यह भी गुर्दे की पथरी होने का संकेत हो सकता है।

गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए अक्सर लोग कोई ऐसा समाधान चाहते हैं जिसका कोई कुप्रभाव न हो। ऐसा ही एक उपाय है प्राकृतिक उपाय जो गुर्दे की पथरी को दूर करने में बहुत ही कारगर साबित होता है साथ हीं साथ शरीर पर इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता।

अंगूर का सेवन करें

अंगूर गुर्दे की पथरी को दूर करने में बहुत ही अहम भूमिका निभाता है। अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में उत्कृष्ट रूप से कार्य करता है क्योंकि इसमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते हैं। अंगूर में एलब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में होता है, इस कारण अंगूर को पथरी के उपचार के लिए फायदेमंद माना जाता है।

विटामिन बी 6 का सेवन

विटामिन बी 6 गुर्दे की पथरी को दूर करने में बहुत ही प्रभावकारी साबित होता है। यदि विटामिन बी 6 का सेवन विटामिन बी ग्रूप के अन्य विटामिन के साथ किया जाए, तो गुर्दे की पथरी में कमी आती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन बी की 100 से 150 मिलीग्राम की दैनिक खुराक गुर्दे की पथरी की चिकित्सीय उपचार में फायदेमंद हो सकती है। यह विटामिन मष्तिष्क संबंधी विकारों को भी दूर करता है। तुलसी के पत्तों में विटामिन बी पाया जाता है इसलिए तुलसी के पत्तों को प्रतिदिन चबाया करें।

प्याज खाएं

गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए प्याज में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। पके हुए प्याज का रस पीने से गुर्दे की पथरी में राहत मिलती है। आप दो मध्यम आकर के प्याज लेकर उन्हें अच्छी तरह से छील लें। अब एक बर्तन में एक गिलास पानी डालकर दोनों प्याज को मध्यम आंच पर पका लें। जब वे अच्छी तरह से पक जाए तो उन्हें ठंडा होने दें। अब इन्हें ग्राइंडर में डालकर अच्छे ग्राइंड कर लें। अब इस रस को छान लें और इसका तीन दिन तक सेवन करें। इसके सेवन से आपको बहुत जल्दी फायदा मिलेगा।

केला

जिस व्यक्ति को पथरी की समस्या हो उसे खूब केला खाना चाहिए क्योंकि केला विटामिन बी-6 का प्रमुख स्रोत है, जो ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता है व ऑक्जेलिक अम्ल को विखंडित कर देता है। इसके आलावा नारियल पानी का सेवन करें क्योंकि यह प्राकृतिक पोटेशियम युक्त होता है, जो पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकता है और इसमें पथरी घुलती है।

करेला

कहने को करेला बहुत कड़वा होता है पर पथरी में यह भी रामबाण साबित होता है। करेले में पथरी न बनने वाले तत्व मैग्नीशियम तथा फॉस्फोरस होते हैं और वह गठिया तथा मधुमेह रोगनाशक है।

चौलाई का साग

पथरी को गलाने के लिये अध उबला चौलाई का साग दिन में थोडी थोडी मात्रा में खाना हितकर होता है, इसके साथ आधा किलो बथुए का साग तीन गिलास पानी में उबाल कर कपडे से छान लें, और बथुये को उसी पानी में अच्छी तरह से निचोड कर जरा सी काली मिर्च जीरा और हल्का सा सेंधा नमक मिलाकर इसे दिन में चार बार पीना चाहिये, इस प्रकार से गुर्दे के किसी भी प्रकार के दोष और पथरी दोनो के लिए साग बहुत उत्तम माने गये है।

औषधीय गुणों से भरपूर अदरक त्वचा को बनाता है आकर्षक व चमकदार

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
सर्दियों के मौसम में अदरक की चाय मिले, तो कहना ही क्या। लेकिन चाय समेत हमारे भोजन को जायकेदार बनाने वाला अदरक खूबसूरती को बढ़ाने में भी मददगार साबित होता है। अदरक को आप फल-सब्जी या फिर दवा भी मान सकते हैं।
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अदरक के चिकित्सीय गुणों की जानकारी पुरातन चिकित्सा पद्धति में भी आसानी से देखी जा सकती है। ब्‍लड शुगर को यह नियंत्रित भी करता है, इसके अलावा यह कैंसर जैसी घातक बीमारी के खतरे को भी कम करता है अदरक। आइए हम आपको गुणों से भरपूर अदरक के फायदे के बारे में बताते हैं।

अदरक के गुण 

त्वचा को निखारे

अदरक त्वचा को आकर्षक व चमकदार बनाने में मदद करता है। सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी के साथ अदरक का एक टुकड़ा खाएं। इससे न केवल आपकी त्वचा में निखार आएगा बल्कि आप लंबे समय तक जवां दिखेंगे।

बीमारियों में रामबाण

दवा के रूप में अदरक का प्रयोग गठिया, आर्थराइटिस, साइटिका और गर्दन-रीढ़ की हड्डियों के रोग (सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस) में प्रमुखता से किया जाता है। इसके अलावा भूख न लगना, पेचिश, खांसी-जुकाम, शरीर में दर्द के साथ बुखार, कब्ज, कान में दर्द, उल्टी होना, मोच और मासिक धर्म की अनियमितता दूर करने में अदरक का प्रयोग किया जाता है।

कैंसर प्रतिरोधी

अदरक में कोलेस्ट्राल का स्तर कम करने, रक्त का थक्का जमने से रोकने, एंटी-फंगल और कैंसर प्रतिरोधी गुण भी पाए जाते हैं।

मार्निग सिकनेस से निजात

अदरक गर्भवती महिलाओं को होने वाली मार्निग सिकनेस (चक्कर आना, उल्टियां होना आदि) से निजात दिलाता है।

दर्द मिटाए चुटकी में

अदरक दर्द भगाने की सबसे कारगर दवा है। 'फूड्स दैट फाइट पेन' पुस्तक के लेखक आर्थर नील बर्नार्ड के मुताबिक अदरक में दर्द मिटाने के प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं। यह बिना किसी दुष्प्रभाव के दर्दनिवारक दवा की तरह काम करता है।
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इसलिए भी खास है अदरक

  • पाचन की समस्या होने पर रोजाना सुबह अदरक का एक टुकड़ा खाएं। ऐसा करने से आपको बदहजमी नहीं होगी। इसके अलावा सीने की जलन दूर करने में भी अदरक मददगार साबित होता है।
  • अदरक में किसी भी चीज को संरक्षित करने के गुण प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।
  • शोध के मुताबिक अदरक का सत्व सल्मोनेला नामक जीवाणुओं को खत्म करने में काफी असरकारक है।
  • शरीर में वसा का स्तर कम करने में भी अदरक काफी मददगार है।
  • यदि आपको खांसी के साथ कफ की भी शिकायत है तो रात को सोते समय दूध में अदरक डालकर उबालकर पिएं। यह प्रक्रिया करीब 15 दिनों तक अपनाएं। इससे सीने में जमा कफ आसानी से बाहर निकल आएगा।

हल्‍दी दूध बनाने के सही तरीके के बारे में जानें

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
हल्‍दी के दूध के फायदों के बारे में लगभग हम सभी जानते हैं, यह गोल्‍डन मिल्‍क दैनिक आहार में सम्मिलित कर आप कई बीमारियों और संक्रमणों को रोक सकते हैं। आयुर्वेद में तो हल्‍दी के दूध को अमृत माना जाता है। 'हल्दी दूध' पर एक सरल वेब खोज ने तो इसे वजन घटाने से लेकर, सर्दी जुकाम और अर्थराइटिस तक कई बीमारियों की रामबाण दवा माना है। लेकिन इसको बनाने की सही विधि से ज्‍यादातर लोग अनजान हैं। आइए इस आयुर्वेदिक औषधि को बनाने की सही विधि के बारे में जानते हैं।
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हल्‍दी दूध बनाने के सही तरीका

हल्‍दी के टुकड़ें लें

हल्दी की एक इंच लंबे टुकड़े को लें। हल्दी पाउडर, हल्‍दी की स्टिक की तरह प्रभावी नहीं होता है, क्‍योंकि पाउडर में संदूषण की संभावना अधिक होती है, इसके अलावा पीसने की प्रक्रिया के दौरान हल्‍दी की गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए एक हल्दी के टुकड़े लेकर उसे क्रश करके इस्‍तेमाल करें।


पेपर्कॉर्न यानी मिर्च के दाने

फिर थोड़ी से पेपर्कॉर्न यानी मिर्च के दाने क्रश करें। काली मिर्च की जगह सफेद किस्म बेहतर रहती है। और सफेदी मिर्च यानी दखनी मिर्च आंखों की रोशनी बढ़ाने का काम करती है। अब आधा गिलास दूध और एक कप पानी लेकर उसमें आधी चम्‍मच क्रश हल्‍दी और मिर्च को मिलाकर अच्‍छे से उबाल लें।


20 मिनट तक उबाले

इस मिश्रण को 20 मिनट उबाले, इस समय तक दूध एक कप हो जाएगा। इसलिए इसमें पानी मिलाने की सलाह दी जाती है, क्‍योंकि पानी न मिलाने से दूध 20 मिनट उबालने पर खीर की तरह हो सकता है। और ऐसा पीने में आरामदायक नहीं लगता।

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शहद या चीनी डालें

20 मिनट उबलने के बाद इस मिश्रण को गैस से उतारकर, इस मिश्रण को छानकर उसमें शहद या चीनी मिला लें, और फिर लें गर्मागर्म हल्‍दी वाले दूध का मजा।


खांसी के लिए देसी घी मिलाये

अगर आप गले में खराश से राहत पाने के लिए इसे ले रहे हैं, तो गर्म हल्‍दी वाला दूध पीने से पहले आधा चम्‍मच देसी घी मिला लें। घी पिघल कर आपके गले पर कोट बनाकर, खांसी से अच्‍छी तरह से राहत देगा। 

कुछ मिनट आराम से बैठकर इस पेय का सुखदायक स्‍वाद और रस्टिक अरोमा आपमें फील गुड फैक्‍टर की वृद्धि करने में मदद करता है।

स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से बहुत फायदेमंद है अश्‍वगंधा

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
अश्वगंधा सैकड़ों वर्ष से एक हर्बल उपचार के रूप में उपयोग में लाया जाता है। न केवल भारत में, बल्कि नेटिव अमेरिकिन और अफ्रीकन भी सूजन और बुखार का इलाज और संक्रमण के खिलाफ संरक्षण के रूप में इसका उपयोग कर रहे है।

अश्वगंधा भारतीय जिनसेंग (औषधीय पौधा जो दक्षिण एशिया और उत्तर अमेरिका में पाया जाता है) के रूप में जाना जाता है और इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता है जैसे कि एशियन जिनसेंग पारंपरिक चीनी चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है। अश्वगंधा चाय पौधो की जड़ों और पत्तियों से बनी होती है और स्वास्थ्य लाभ के लिए भी उपयोग में लाई जाती है। यह चाय आसानी से एक पोने घंटे के लिए पानी में सूखी जड़ी बूटी को उबालने और फिर इसको छानने के द्वारा घर पर आसानी से बनाई जा सकती है। पौधे की जड़ बड़े पैमाने पर वजन में कम से कम तीन ग्राम होनी चाहिए, और यह मात्रा तीन से चार कप चाय बनाने के लिए चाहिए।

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क्‍या है अश्वगंधा

अश्वगंधा टमाटर के रूप में एक ही संयंत्र परिवार से एक झाड़ी (पौधा) है। इसमें फ्लेवोनॉइड और एंटीऑक्सीडेंट की तरह कई लाभकारी तत्व है। अनुसंधान से पता चलता है कि यह मस्तिष्क में न्यूरोलॉजिकल ट्रांसमिशन में सुधार लाने में मदद करता है। स्कूल जाने वाले बच्चों नें याददाश्त में सुधार आने जैसे लाभो के बारे में कहा है और हर सुबह नियमित रूप से अश्वगंधा चाय के सेवन द्वारा ज्ञान को स्वीकार किया है। आइए जानें अश्‍वगंधा आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कैसे फायदेमंद है।


एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर

अश्वगंधा के एंटीऑक्सीडेंट गुण जाहिरा तौर पर एलडीएल ऑक्सीकरण में कमी लाते है, जिससे हृदय रोग के विकास के जोखिम में कमी आती है यदि नियमित रूप से यह लिया जाता है। अश्वगंधा के एक अन्य लाभ मधुमेह रोगियों के लिए मोतियाबिंद को रोकना है। मोतियाबिंद दुनिया में अंधापन का एक प्रमुख कारण हैं, और भी मधुमेह रोगियों के लिए एक विकलांगता के प्रमुख स्रोत हैं। जिनसेंग और जिनसेंग की तरह अश्वगंधा जड़ी बूटी ओस्सिडेटिव प्रक्रियाओं को रोकती है जोकि मोतियाबिंद को विकसित करने का कारण हो सकता है। अश्वगंधा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कैंसर को रोकने में भी मदद कर सकता है, हालांकि एक डॉक्टर के परामर्श के बिना कभी भी सप्लीमेंट नही लिया जाना चाहिए।

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अल्‍जाइमर रोग का उपचार करें

यह अल्जाइमर रोग के उपचार में भी सहायक पाया गया है। फिलिस बाल्च के अनुसार, एक प्रमाणित पोषण विशेषज्ञ के मुताबिक, यह जड़ी बूटी मस्तिष्क उपयोगी एक्टेल्कोलाइन, जो एक रसायन है संशोधित करने के द्वारा सही समृति हानी में मदद करता है, जो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संदेश पहुंचाता है। यह आश्चर्यजनक जड़ी बूटी अपनी ही कोशिकाओं को नष्ट करने से मस्तिष्क को बचाने की मदद करता है, स्मृति हानि और संज्ञानात्मक हानि को रोकता है।


गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद 

गर्भवती माताओँ को इसके सेवन के लिए अत्यधिक सिफारिश की गई है। यह मां के रक्त को शुद्ध करने और उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए भी जाना जाता है पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाइयों को प्रसव के दौरान अश्वगंधा चाय का उपयोग करते है क्योंकि यह एक गर्भाशय शामक है।


मन को शांत करें

अश्वगंधा को एक हल्के शामक के रूप में भी जाना जाता है चूंकि यह मन को शांत करता है और आरामदायक नींद को बढ़ावा देते है। यह एक टॉनिक के रूप में आयुर्वेदिक चिकित्सा में तनाव को रोकने और सहनशक्ति को बढ़ाता है।

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एंटी-एजिंग भी है अश्‍वगंधा  

इसमें एंटी-एजिंग लाभ भी है चूंकि यह ऊतको के पुनर्जनन को बढ़ावा देता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। 2,500 से अधिक वर्षों के लिए, अश्वगंधा को एक एडेपटोजेन के रूप में उपयोग किया जाता है, जिसका अर्थ है कि यह दिमाग औऱ शरीर को तनाव से उभरने में मदद रकता है। यह फिर से युवा, संतुलन, मजबूत और तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए उपयोग किया जाता है।


स्वाभाविक रूप से अश्वगंधा में स्टेरॉयड होता है जो विभिन्न स्थितियों में लाभकारी है जैसे कि गठिया और कार्पन टनेल सिंड्रोम के उपचार में लाभकारी है। ये प्राकृतिक स्टेरॉयड ऐसे इनफ्लेम्मेटरी स्थितियों के साथ जुड़े दर्द को कम करने में विशेशरूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि, यहां इस जड़ीबूटी के के लिए स्वास्थ्य लाभो का समर्थन करने के लिए कई शोध किये गए है, यह उचित होगा कि अश्वगंधा चाय के साथ किसी भी गंभीर चिकित्सा स्थिति के उपचार से पहले चिकित्सक से परामर्श करें।

स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी बहुत उपयोगी है हरा धनिया

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
भारतीय खानपान में हरे धनिया का उपयोग सदियों से होता आ रहा है। यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद होता है। इसमें प्रोटीन, वसा, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल  आदि पाया जाता है। इसके अलावा हरे धनिया के पत्‍ती में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामीन, पोटोशियम और विटामिन सी भी पाया जाता हैं। हरा धनिया पेट की समस्‍याओं के लिए बहुत फायदेमंद है, यह पाचनशक्ति बढ़ाता है। धनिया का प्रयोग शाकाहार और मांसाहार दोनों में किया जाता है। गुणों से भरपूर धनिया के फायदों के बारे में हम आपको जानकारी दे रहे हैं।
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पाचनशक्ति बढ़ाये

हरा धनिया पेट की समस्‍याओं का निवारण करता है, यह पाचनशक्ति बढ़ाता है। धनिया की ताजी पत्‍तों को छाछ में मिलाकर पीने से बदहजमी, मतली, पेचिश और कोलाइटिस में आराम मिलता है। हरा धनिया, हरी मिर्च, कसा हुआ नारियल और अदरक की चटनी बनाकर खाने से अपच के कारण पेट में होने वाले दर्द से आराम मिलता है। पेट में दर्द होने आधा गिलास पानी में दो चम्‍मच धनिया डालकर पीने से पेट दर्द से राहत मिलती है।


मस्‍सों से मुक्ति दिलाये

मस्‍सों से मुक्ति के लिए हरा धनिया एक कारगर उपाय है। इस उपाय को करने के लिए हरे धनिया को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे रोजाना मस्सों पर लगाएं।


कमजोरी दूर करें

अगर आपको थका-थका या शरीर में कमजोरी महसूस होती है या फिर चक्कर आते हो तो दो चम्मच धनिए के रस में दस ग्राम मिश्री व आधी कटोरी पानी मिलाकर सुबह-शाम लेने से फायदा होता है।
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आंखों की रोशनी बढ़ाये

नियमित रूप से हरे धनिये का प्रयोग अपने खाने में करने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है। क्‍योंकि हरे धनिये में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है जो आंखों के लिए बहुत आवश्‍यक होता है।


श्‍वास रोगों को दूर करें

हरा धनिया श्‍वास संबंधी रोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। खांसी, दमा या सांस फूलता हो तो धनिया तथा मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर रख लें। एक चम्मच चावल के पानी के साथ रोगी को पिलाएं। कुछ दिन नियमित रूप से इस उपाय को करने से आराम आने लगेगा।


त्‍वचा के लिए लाभकारी

एक चम्मच धनिया के जूस को चुटकी भर हल्दी के साथ मिलाकर मुंहासे पर लगाना लाभप्रद होता है। चेहरे पर तिल होने पर रोजाना हरे धनिए की पत्तियों को रगडऩे से लाभ होता है।
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अन्‍य लाभ

  • टाइफाइड में भी यह उपयोगी है, टाइफाइड होने पर हरी धनिया के पत्‍तों का सेवन करना चाहिए।
  • अधिक मासिक धर्म आने पर छह ग्राम धनिया के बीज को आधा लीटर पानी में उबालें। पानी आधा होने पर थोड़ी सी शक्कर मिलाकर गर्म पीएं।
  • लू लगने पर हरी धनिया को पीसकर उसका रस निकाल लीजिए, इस रस को चीनी के साथ मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
  • नींद न आती हो तो हरे धनिए में मिश्री मिलाकर चाशनी बनाएं। दो चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लें।   
  • सिर के बाल झडऩे पर हरे धनिए का रस लगाएं।

बढ़े हार्ट रेट को कम करने में प्रभावी है केला और किशमिश

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
हार्ट रेट को पल्‍स रेट के रूप में भी जाना जाता है। समय की प्रत्येक इकाई में होने वाली दिल की धड़कनों की संख्या को हार्ट रेट कहते हैं। इसे धड़कन प्रति मिनट के रूप में व्यक्त किया जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया हेल्‍थ सिस्‍टम के अनुसार, एक वयस्‍क की नार्मल हार्ट रेट 60-80 धड़कन प्रति मिनट होती है। हालांकि एथलीटों का हार्ट की कम दर यानी 40 मिनट प्रति मिनट के हिसाब से धड़कता है। दिल की लय और ब्‍लड फ्लो को ताकत देने के लिए हार्ट रेट महत्‍वपूर्ण होता है।
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बढ़ी हुई हार्ट रेट को टेककार्डिया (एक वयस्क में प्रति मिनट लगातार 100 से अधिक धड़कना) कहते हैं, यह हार्ट डिजीज, स्‍ट्रोक और किडनी डिजीज के खतरे को बढ़ा देता है। और इससे पसीना, मतली या उल्‍टी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। हार्ट रेट यानी दिल की धड़कन का बढ़ना एक समस्‍या की तरह है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। लेकिन घबराइए नहीं क्‍योंकि योग और एक्‍सरसाइज की तरह केले और किशमिश जैसे आम आहार हार्ट रेट को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। आइए जानें हार्ट रेट को कम करने में केला और किशमिश आपकी मदद कैसे कर सकते हैं।

हार्ट रेट को कम करने में मददगार केले

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के अनुसार, केले पोटेशियम का बहुत अच्छा स्रोत हैं और पोटेशियम कम हार्ट रेट को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। पोटेशियम की कमी के कारण मांसपेशियों में ऐंठन और एनर्जी की कमी देखे को मिलती है, जिससे कारण हार्ट रेट अनियमित हो जाती है। केले की 96 कैलोरी में 400 मिलीग्राम पोटेशियम होता हैं। यह दैनिक आवश्यकता का 11 प्रतिशत है। केले में सोडियम 1 मिलीग्राम से कम होता है, जो कम सोडियम आहार लेने वाले लोगों के लिए मूल्‍यवान आहार हो सकता है।
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वैसे तो सोडियम शरीर के लिए जरूरी पौष्टिक होता है, लेकिन शरीर के लिए कम मात्रा में ही इसकी जरूरत होती है। इसलिए ब्‍लड प्रेशर को कम करने के लिए चिकित्सक नमक कम खाने को कहते हैं। केले में सिर्फ 1 मिलीग्राम ही सोडियम होता है, इसलिए दिल के रोगी को केला खाने की सलाह दी जाती है।

 

किशमिश से भी कम होती है हार्ट रेट

किशमिश भी पोटेशियम से भरपूर होता है और इसमें 1,000 मिलीग्राम से अधिक मिलीग्राम पोटेशियम होता है। साथ ही सोडियम में किशमिश कम मात्रा यानी सेवारत प्रति 60 मिलीग्राम होता है। हार्ट रेट तेज होने पर एक गिलास दूध में 10 ग्राम किशमिश और एक चम्मच मिश्री डालकर उबालें। उबालने के बाद, दूध को थोड़ा ठंडा करके किशमिश को खाकर दूध को पी लें। नियमित रूप से 15 दिन इस उपाय को करें। यह उपाय हार्ट रेट को सामान्य करने वाला प्रभावशाली हदय शक्तिवर्धक है।
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हार्ट रेट को नॉर्मल करने वाले अन्‍य उपाय

  • ब्राजील नट जैसा स्‍वास्‍थवर्धक नट विटामिन और मिनरल विशेष रूप से मैग्‍नीशियम से भरपूर होता है। प्राकृतिक रूप से हार्ट रेट को कम करने के लिए यह नट खाये।
  • बादाम को भी दिल के लिए स्‍वस्‍थ माना जाता है। यह एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन से भरपूर होता है, जो हृदय रोगों, खराब कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर और भोजन की लालसा को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • कैल्शियम से भरपूर दूध को आपको अपने आहार में दूध शामिल करना चाहिए। कैल्शियम की कमी हार्ट रेट के प्रमुख कारणों में से एक है। अगर आप प्राकृतिक रूप से  से तेज हार्ट रेट को कम करना चाहते हैं, तो आपके आहार में कैल्शियम से भरपूर आहार का होना आवश्यक है।
  • एक और मैग्‍नीशियम युक्‍त आहार यानी कद्दू हार्ट रेट को कम करने में आपकी मदद करता है। मैग्‍नीशियम हार्ट रेट को नियंत्रित करता है।

आंवला एक फायदे हैं अनेक

प्रस्तुतकर्ता preity in: ghrelu nushke
कहते हैं बुजुर्गों की बात का और आंवले के स्वाद का पता बाद में चलता है। जी, आंवला बेहद गुणकारी है। इसलिए इसे हर मर्ज की दवा भी कहा जाता है। आंवला पाचन तंत्र से लेकर स्मरण शक्ति को दुरुस्त करता है। नियमित रूप से आंवले का सेवन करने से बुढ़ापा भी दूर रहता है। मधुमेह, बवासीर, नकसीर, दिल की बीमारी जैसी समस्याओं का इलाज आंवले में छिपा है। आइए हम आपको बताते हैं कि आंवला आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है।
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आंवले का सेवन करने के फायदे

  • आंवला विटामिन-सी का अच्छा स्रोत होता है। एक आंवले में 3 संतरे के बराबर विटामिन सी की मात्रा होती है।
  • आंवला खाने से लीवर को शक्ति मिलती है, जिससे हमारे शरीर में विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर निकलते हैं।
  • आंवला का सेवन करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
  • आवंले का जूस भी पिया जा सकता है। आंवला का जूस पीने से खून साफ होता है।
  • आंवला खाने से आंखों की रोशनी बढती है।
  • आंवला शरीर की त्वचा और बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने आपका शरीर स्वस्थ बना रहता है।

आंवला खाने से बीमारियों में फायदा –

मधुमेह 

डायबिटीज के मरीजों के लिए आंवला बहुत फायदेमंद होता है। मधुमेह के मरीज हल्दी के चूर्ण के साथ आंवले का सेवन करे। इससे मधुमेह रोगियों को फायदा होगा ।
diabetes in hindi

बवासीर

बवासीर के मरीज सूखे आंवले को महीन या बारीक करके सुबह-शाम गाय के दूध के साथ हर रोज सेवन करे। इससे बवासीर में फायदा होगा।

नकसीर के लिए

यदि नाक से खून निकल रहा है तो आंवले को बारीक पीसकर बकरी के दूध में मिलाकर सिर और मस्तिक पर लेप लगाइए। इससे नाक से खून निकलना बंद हो जाएगा।

दिल के मरीज

आंवला खाने से दिल मजबूत होता है। दिल के मरीज हर रोज कम से कम तीन आंवले का सेवन करें। इससे दिल की बीमारी दूर होगी। दिल के मरीज मुरब्बा भी खा सकते हैं।

खांसी और बलगम 

खांसी आने पर दिन में तीन बार आंवले का मुरब्बा गाय के दूध के साथ खाएं। अगर ज्यादा तेज खांसी आ रही हो तो आंवले को शहद में मिलाकर खाने से खांसी ठीक हो जाती है।

coughing in hindi

पेशाब में जलन 

यदि पेशाब करने में जलन हो तो हरे आंवले का रस शहद में मिलाकर सेवन कीजिए। इससे जलन समाप्त होगी ओर पेशाब साफ आएगा।


पथरी के लिए 

पथरी की शिकायत होने पर सूखे आंवले के चूर्ण को मूली के रस में मिलाकर 40 दिन तक सेवन कीजिए। इससे पथरी समाप्त हो जाएगी।

आंवला खाने से कई प्रकार की शरीरिक समस्याओं और रोगों से बचाव होता है। और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। खासतौर पर सर्दियों में अंवला बहुतायत में मौजूद होता है। आंवला का कई प्रकार से सेवन किया जा सकता है और किसी भी रूप में इसका सेवन करने से ये उतना ही फायदा करता है।

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