राखी आने वाली है. हम अपनी बहन को हर मुमकिन तोहफ़ा देने की कोशिश करते हैं. लेकिन इस बार दो भाईयों ने अपनी बहन को तोहफ़े में उसकी जिंदगी देने की कोशिश की. वाकया कुछ यूं है कि 10 अगस्त को गुड़गांव के एक पेट्रोल पंप का क्लर्क 17.5 लाख रुपये ले कर बैंक जा रहा था. तभी अचानक 2 लोगों ने पैसों से भरा बैग उससे छीना और वहां से चंपत हो गए. आनन-फ़ानन में उस व्यक्ति ने पुलिस को ख़बर दी. पुलिस मौकाए-वारदात पर पहुंची और तफ़तीश शुरू कर दी.
शुरू में देख कर यही लगा कि ये डकैती नौसिखियों ने ही की है. जांच आगे बढ़ी तो सबके होश फ़ाख्ता हो गए. लेकिन पुलिस को इस केस को सुलझाने की खुशी से ज़्यादा डकैतों को पकड़ने का गम था.
दरअसल पदमाकर और रत्नाकर नाम के दोनों डकैतों ने ये चोरी पैसों की लालच में नहीं बल्कि बहन के प्यार में की थी. इनकी बहन कैंसर की मरीज है और इनके पास उसके इलाज़ के लिए पैसे नहीं थे. यहां तक की हॉस्पिटल के भी पैसे भरने की इनकी हैसियत नहीं थी, जिसके कारण इन्हें ये कदम उठाना पड़ा. कारण कुछ भी रहा हो, जुर्म तो जुर्म ही है जिसकी सज़ा इन दोनों को भुगतनी ही पड़ेगी. और ये एक सबक है कि रिश्ता कोई भी हो, कारण कुछ भी हो, गलत लिया हुआ रास्ता आपको कभी सही जगह नहीं पहुंचा सकता.
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