थोड़े दिन पहले ही हमने एक आर्टिकल के माध्यम से आपको बताया था कि बॉलीवुड के नाना पाटेकर किसानों की मौत को ले कर कितने चिंतित हैं. अगर आप उस आर्टिकल को पढ़ना चाहतें हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें gazabpost
लगातार अख़बारों से ले कर इंटरनेट पर आंकड़े छप रहे हैं कि 2014 में लगभग 12,000 किसानों ने आत्महत्या कर ली. इस त्रासदी के बाद सरकारों को दोष देने का काम तो हर कोई कर रहा है लेकिन बॉलीवुड के अक्खड़ हीरो नाना पाटेकर और मराठी फ़िल्मों के मकरंद अनसपुरे ने आगे आ कर आलोचना नहीं, बल्कि मदद के हाथ बढ़ाये. बीते शनिवार इन दो सितारों ने 113 विधवाओं को 15000-15000 रुपये दे कर उनकी सहायता की.
पिछले साल के मुकाबले हुई है बढ़ोतरी
बीते साल जहां अभी तक 628 आत्महत्याएं दर्ज की गई थीं, वहीं इस साल ये आंकड़ा 660 पार कर चुका है. सबसे ज़्यादा आत्महत्याएं बीड़, लाटूर और ओसमानाबाद में हुई हैं.
सरकार का नहीं है दोष
नाना पाटेकर अपने वकतव्य में कह चुके हैं कि “प्रदेश में सूखा आने के पीछे किसी सरकार का हाथ नहीं है बल्कि ये तो प्रकृति का कोप है. हम सब को इससे मिल कर निपटना होगा”. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नाना पाटेकर कहते हैं कि “जब तक किसानों को एक दाम पर सामान नहीं मिलेगा और एक निश्चित दाम पर ही उनके द्वारा उपजा उत्पाद नहीं बिकेगा, तब तक ये सब थमने वाला नहीं है”.
Source: odishasuntimes
मन दुखी होने से कुछ नहीं होता
सरकार को पहल करनी चाहिए, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इसको ले कर सचेतता बरतनी होगी. नाना का कहना है कि “जब हम चैरिटी करने जाते हैं, तो बहुत लोगों को असहाय देख कर मन दुखी होता है, लेकिन दुखी होने से कुछ नहीं होगा. हमें काम करना होगा, कदम बढ़ाने होंगे”.
दोस्तों, अगर नाना पाटेकर और मकरंद जी की तरह ही हमारे समाज के अन्य प्रभावशाली लोग आगे बढ़ कर किसानों की मदद करें, तो हमारे समाज के स्तर में कितना सुधार होगा, हालात कितने सुधरेंगे... ज़रा सोचिए!
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