मेम्मोग्राम स्तनों के एक्सरे को कहते हैं जो कि स्तनों की किसी बीमारी को जांचने के लिए लिया जाता है।मेम्मोग्राम की मदद से कैंसर का पता शुरुआती चरण में लगने पर उसे होने से रोका जा सकता है।इसे डिजिटल मैमोग्राफी भी कहते हैं।
मेम्मोग्राम: एकजीवनरक्षक
स्तनों के कैंसर से कई महिलाओं की मृत्यु होती है। मेम्मोग्राम स्तनों का एक्सरे करता है तथा महिलाओं के स्तनों में हुए किसी भी प्रकार के विकार को दर्शाता है।इसकी मदद से ५० वर्ष से ज़्यादा की महिलाओं के स्तन कैंसर की वजह से मरने की संख्या कम हो गयी है। कुछ लोग मानते हैं कि रेडिएशन के खराब प्रभाव पड़ते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक की मदद से कैंसर से बचने वाली महिलाओं की तुलना में रेडिएशन की शिकार महिलाओं का प्रतिशत काफी कम है। मेम्मोग्राम चिकित्सा जगत की एक नयी पद्दति है। हाल ही में डिजिटल इमेजिंग की शुरुआत हुई है जिसमें मेम्मोग्राम की तसवीरें कंप्यूटर पर संभालकर रखी जा सकती हैं। मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग मेम्मोग्राम का एक विकल्प है।यह चुम्बक, रेडियो तरंगों एवं कंप्यूटर का मिश्रण है। यह मैमोग्राफी की तुलना में काफी साफ़ तसवीरें दिखाता है।
मेम्मोग्राम मेंक्या दिखता है?
स्तन में गाँठ पड़ने से पहले ही स्तन की समस्या का पता लगा लेने में मेम्मोग्राम हमारे काफी काम आता है। यह अलग अलग कोणों से स्तनों का एक्सरे लेता है। स्तनों में किसी भी हलके बदलाव को भाँपने के लिए बहुत सी तसवीरें ली जाती हैं। इसे डायग्नोस्टिक मेम्मोग्राम कहते हैं। मेम्मोग्राम स्तनों में दो तरह के परिवर्तन दिखाता है – कैल्सिफिकेशन स्तनों के तंतुओं पर खनिजों का छोटा समूह होता है और यह तस्वीरों में सफ़ेद धब्बों की तरह दिखता है। ये कैंसर युक्त हो भी सकता है और नहीं भी। मासेस सीस्ट और सैक की तरह होते हैं तथा ये कैंसर रहित कठोर ट्यूमर होते हैं। इसका पता लगाने के लिए बायोप्सी की आवश्यकता होती है।
मेम्मोग्राम कब कराएं
आजकल डॉक्टरों के अनुसार महिलाओं को ४० की उम्र के बाद अपना मेम्मोग्राम साल में एक बार करवाना चाहिए। अगर आपके परिवार में पहले भी किसी को स्तन का या अंडाशय का कैंसर हो चुका है तो मेम्मोग्राम और पहले करवाना चाहिए।
मेम्मोग्राम के महत्वपूर्ण तथ्य
१. मेम्मोग्राम स्तनों का एक्सरे होता है जो आसानी से पकड़ में ना आने वाले कैंसर को भी पकड़ लेता है। इसके जल्दी पकड़ में आने से उपचार में आसानी होती है।
२. मेम्मोग्राम का सबसे अच्छा समय वह होता है जब स्तन ज़्यादा नरम नहीं रहते। अगर इसे रजोनिवृत्ति के बाद किया जाए तो हर साल इसे इसी समय किया जाना चाहिए।
३. डिओड्रेंट, परफ्यूम, पाउडर या लोशन से मेम्मोग्राम की प्रक्रिया में मुश्किलें आती हैं।
४. अगर आपने स्तनों का इम्प्लांट भी करवाया है तो भी हर साल मेम्मोग्राम करवाना आवश्यक है।
५. अगर आप शुरूआती समय से ही मेम्मोग्राम परीक्षण करवाना शुरू कर दें तो अपनी ज़िन्दगी बचा सकती हैं।
६. इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। यह सिर्फ २० मिनटों का छोटा सा परीक्षण है। यह एक सुरक्षित तरीका है तथा इससे महिलाओं को कोई मुश्किल नहीं होती।
मेम्मोग्राम के काम करने का तरीका
मेम्मोग्राम में एक मशीन का प्रयोग होता है जो सिर्फ स्तनों के तंतुओं पर ध्यान देती है। इस मशीन में दो प्लेट्स होते हैं जो स्तनों को दबाकर तंतुओं को फैला देते हैं। आम मेम्मोग्राम में तसवीरें बड़े कागज़ों पर छापी जाती हैं। डिजिटल मेम्मोग्राम का ही प्रयोग आमतौर पर किया जाता है पर इसमें तसवीरें कंप्यूटर पर ली और रखी जाती हैं।
मैमोग्राफी के फायदे
इससे कैंसर जल्दी पकड़ में आता है और ठीक होने की संभावना ज़्यादा होती है। नियमित रूप से मैमोग्राफी करने से ५० साल से ज़्यादा की महिलाओं में यह कैंसर रोका जा सकता है।
मैमोग्राफी के नुकसान
१. कई बार परीक्षण में गलत नतीजे भी आ सकते हैं।
२. कई बार परीक्षण में कंकेर के लक्षण पकड़ में आते हैं जो कि आम जीवन में बिलकुल हानिकारक नहीं होते।
३. ये कैंसर के हर पहलू का निरिक्षण नहीं करती। स्तनों के कैंसर के कुछ प्रकार ऐसे होते हैं जो कि जल्दी पकड़ में आ जाने पर भी ठीक नहीं होते।
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