पुलिस महकमें के हाथों में देश के सुरक्षा की बागडोर होती है. और ऐसे कामों में छोटे-छोटे आरोपों का लगना तो आम बात मानी जाती है. लेकिन पुलिस के ऊपर कई बार बेहद संगीन आरोप भी लगे हैं. जिसमें सबसे ज़्यादा फर्जी एन्काउंटर के आरोप हैं. हम आज आपको रूबरू करा रहे हैं ऐसे ही 7 कुख्यात मामलों और एन्काउंटरों से जिन्होंने खाकी को दाग-दाग किया हैं
1. इशरत जहां
मुंबई की रहने वाली 19 साल की इशरत जहां का एन्काउंटर 15 जून 2014 को हुआ था. उसके साथ 3 और लोग थे. पुलिस के मुताबिक इशरत और उसके 3 साथी लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी थे, जो तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने के लिए आए थे. इस एन्काउंटर की जांच में सामने आया था कि इशरत का एन्काउंटर मामला फर्जी था. जिस को गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी. इस केस को हाई कोर्ट ने CBI को दे दिया. जिसकी जांच आज भी चल रही है.
2. सोहराबुद्दीन शेख
सोहराबुद्दीन शेख मुंबई का अंडर वर्ल्ड माफ़िया था. जिसको उसकी पत्नी के साथ गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद मुंबई हाई-वे से पकड़ा था. तीन दिन बाद उसकी लाश अहमदाबाद के बाहर हाई-वे पर मिली. सोहराबुद्दीन के भाई और मीडिया ने इसे फर्जी एन्काउंटर बताया. इस केस को CBI को सौंप दिया गया. जांच के बाद पुलिस के कई आला अफ़सर इस केस में संलिप्त पाए गए.
3. तुलसीराम प्रजापति
तुलसीराम प्रजापति, सोहराबुद्दीन का साथी था. जिसकी मौत पुलिसिया हिरासत में हुई थी. तुलसीराम की मौत में भी पुलिस का हाथ होने की ख़बर आई. बताया गया कि वो सोहराबुद्दीन एन्काउंटर केस का चश्मदीद गवाह था. 2006 में हुई उसकी मौत के करीब 5 साल बाद तुलसीराम का केस CBI को दे दिया गया.
4. बाटला हाऊस एन्काउंटर
देश की राजधानी के बीच दिनदहाड़े हुए इस एन्काउंटर ने पूरे देश को दहला दिया था. जामिया नगर में हुए इस एन्काउंटर मे दो लोगों को पुलिस ने मार गिराया था, जबकि 2 को ही हिरासत में लिया था. इस एन्काउंटर के बाद जामिया विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र सड़को पर आ गए थे और पुलिस के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. कई राजनीतिक पार्टियों ने इसकी जांच की मांग की. मानवाधिकार आयोग की जांच के बाद दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट मिली थी.
5. अंसल प्लाज़ा
सन् 2002 में दिल्ली के एक मॉल अंसल प्लाज़ा की कार पार्किंग में पुलिस ने एन्काउंटर में 2 आतंकवादियों को मार गिराया था. लेकिन इस केस ने तब एक अजीब मोड़ लिया, जब हरि कृष्ण नाम के एक डॉक्टर ने ख़ुद को इस केस का चश्मदीद गवाह बताया और अदालत में गवाही दी. जिसमें उन्होंने इसे एक फर्ज़ी एन्काउंटर बताया.
6. रामनारायण गुप्ता
रामनारायण गुप्ता छोटा राजन का साथी था. जिसको मुंबई पुलिस ने पहले पकड़ा और उसी दिन उसका एन्काउंटर कर दिया गया. रामनारायण के भाई और वकील ने इसे फर्ज़ी एन्काउंटर बताया. और इसकी जांच की मांग की. जांच के बाद इस केस में 22 पुलिस वालों को संलिप्त पाया गया.

7. माया डोलस
माया डोलस अंडरवर्ल्ड डांन दाउद इब्राहिम का गुर्गा था. जिसका एन्काउंटर पुलिस इतिहास का सबसे बड़ा एन्काउंटर माना जाता है . दिनदहाड़े मुंबई के एक रिहायशी इलाके लोखंडवाला में इस एन्काउंटर को अंजाम दिया गया था. इस केस की जांच में कई पुलिस अधिकारियों के नाम आए थे. लेकिन लम्बे समय तक चले इस केस में सारे पुलिस महकमें को क्लीन चिट मिली थी.
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