हरिवंश राय बच्चन ने क्या खूब लिखा है "लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती". ये कविता आज भी उतनी ही सार्थक है, जितनी की उस समय रही होगी. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के तोता राम को देख कर तो यही लगता है. कभी एक-एक रोटी के मोहताज और ठेले पर रात गुजारने वाले तोताराम ने अपनी मेहनत और पक्के इरादों के बल पर तीन पीढ़ियों से अपने परिवार की देहाड़ी मज़दूरी की परम्परा को तोड़ते हुए खेत किराये पर ले कर उद्यानिकी विभाग की मदद से हल्दी और अदरक की खेती करनी शुरू की. इसमे उन्हें काफ़ी मुनाफ़ा हुआ और उनकी किस्मत बदल गई.
मुफलिसी के दिनों को याद करते हुए तोताराम की पत्नी रुक्मणि कहती है कि कभी हमारे पास सोने के लिए एक छत नहीं थी पर इनकी मेहनत और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से आज हमारे पास दो-दो घर हैं.
तोताराम का जीवन आज पूरी तरह से बदल गया है. आज तीन ट्रैक्टर, एक जीप और वैन सहित वो कई एकड़ जमीन के मालिक है.
तोताराम का जीवन आज पूरी तरह से बदल गया है. आज तीन ट्रैक्टर, एक जीप और वैन सहित वो कई एकड़ जमीन के मालिक है.
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