ब्राइटन रॉकजग सुरैया 1947 ब्रिटिश क्लासिक; क्राइम थ्रिलरनिर्देशक : जॉन बाउल्टिंगनिर्माता : रे बाउल्टिंगकास्ट : कैरल मार्श, रिचर्ड अटैनबोरो, हर्मियोन और विलियम हर्टनेलकालावधि : 92 मिनट “ईश्वर की दया की भयावह अनभिज्ञता” यह किताब पिछले वर्ष रिलीज़ की गई और ग्राहम ग्रीन द्वारा 1938 के उपन्यास पर आधारित ब्रिटिश फ़िल्म क्लासिक ब्राइटन रॉक का वर्णन कर देती है। ब्राइटन के समुद्र किनारे रिसोर्ट पर सेट की गई यह एक क्राइम थ्रिलर फ़िल्म है जो आस्था का अर्थ खोजने से संबंधित है। पिंकिए नाम का 17 वर्षीय क्रूर गैंगस्टर एक जवान वेटर्स से प्रेम निवेदन करता है और उससे शादी करता है ताकि हत्या के एक मामले में उसकी जाँच-पड़ताल न की जा सके। रोज़ मासूम है और पिंकिए दुष्ट प्रवृत्ति का है और उनकी यह प्रवृत्ति ‘ग्रीनलैंड’ कहलाई जाने वाली गंभीर अस्पष्टता को प्रदर्शित करती है जो कि सभी को डराती है। यह आध्यात्मिक लैंडस्कैप देता है जो कि कई उपन्यासकारों के लेखन की पृष्ठभूमि है। निर्धारित सिद्धांतों की दुनिया को इडा अर्नोल्ड द्वारा प्रदर्शित किया गया है जो कि एक अच्छी शुभचिंतक हैं और मासूम रोज़ को पिंकिए के ख़तरनाक जाल से बचाने की कोशिश करती हैं। अपने अच्छे इरादों के बावजूद इडा, मनोरंजन केंद्रों और पर्यटक आकर्षण की चमक-धमक के लिए मशहूर हॉलिडे रिसोर्ट की पृष्ठभूमि के सामने होने वाली साज़िश को रोकने के लिए या तो थोड़ा या फिर कुछ नहीं कर सकती है। रोज़ इस हत्यारे को बहुत प्यार करती है। रोज़ के आग्रह पर पिंकिए आवाज़ रिकॉर्ड करके उसे अपने प्यार का एक तोहफ़ा देने को राज़ी हो जाता है। फ़िल्म के सबसे ख़तरनाक दृश्य की बात करें तो वह यह है कि पिंकिए जब रिकॉर्डिंग कियोस्क में आवाज़ रिकॉर्ड करने के लिए अंदर जाता है और कियोस्क के बाहर खड़ी होकर रोज़ जब उसे साउंड प्रूफ़ शीशे से देखती है तब वह उसके लिए अपनी असली भावना को शब्दों में बयान करते हुए कहता है : “तुम चाहती हो कि मैं कहूँ आई लव यू। लेकिन मैं नहीं कहूँगा। जानती हो क्यों? क्योंकि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ बेगैरत लड़की।” बाद में गुस्से में आकर पिंकिए रिकॉर्ड किए गए डिस्क को तोड़ने का असफल प्रयास करता है जिसे उसने रोज़ को दिया था और रोज़ ने उसे अभी तक सुना भी नहीं था क्योंकि उसके पास ग्रामोफ़ोन नहीं था। इडा द्वारा बुलाई गई पुलिस के सही समय पर पहुँचने से रोज़ की ज़िंदगी बच जाती है। पिंकिए ने रोज़ के साथ मिलकर आत्महत्या करने का समझौता किया था और इस तरह वह उसे मारना चाहता था। रोज़ बच जाती है और पिंकिए को उसके किए की सज़ा मिलती है। पिंकिए को खोने के दुःख से उबरने के बाद, रोज़ को एक कॉन्वेंट में रहने की जगह दी जाती है। वहाँ एक नन उसे “ईश्वर के दया की भयावह अनभिज्ञता” को स्वीकार करने के लिए कहती है। यहाँ आकर वह पिंकिए द्वारा दिए गए रिकॉर्ड को बजाती है। क्षतिग्रस्त हुई डिस्क ग्रूव में अटक जाती है और पिंकिए के शब्द दोहराए जाने लगते हैं : “तुम चाहती हो कि मैं कहूँ आई लव यू। आई लव यू। आई लव यू। आई लव यू।” ख़ुशी के आँसुओं के साथ रोज़ दोहराए जाने वाले उन शब्दों को सुनती रहती है जो कि सूली पर चढ़े हुए ईसा मसीह के चित्र के नीचे ग्रामोफ़ोन पर बज रहे थे। फ़िल्म का अंतिम संदेश क्या है? यही कि पिंकिए के लिए रोज़ के प्यार की तरह धार्मिक आस्था और कुछ नहीं बल्कि एक क्रूर धोखा है? ईश्वर की दया इतनी भयावह क्यों है? फ़िल्म बताती है कि इन सवालों का केवल एक ही जवाब है। और वह है प्यार। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप किससे प्यार करते हैं – ईश्वर, इंसान, आदर्श ये सब मात्र एक भ्रम है। जिस प्यार को हम महसूस करते हैं वही असलियत होती है जिसको जानने की हम आशा रख सकते हैं।
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