जाति और मज़हब के नाम पर लड़ने वालों के गाल पर तमाचा हैं मोहम्मद ज़हीर. इंदौर जिले के खंडवा में ज़हीर ने वो कर दिखाया है जिसके लिए हर जाति, हर धर्म के लोग उन्हें सलाम करेंगे. 40 साल के ज़हीर सालों से मंदिर और मस्जिद दोनों की देखभाल एक साथ कर रहे हैं. ज़हीर, अल्लाह, भगवान और गॉड को एक मानते हैं. इनका कहना है कि "इस बात पर लड़ने वाले बेवकूफ़ होते हैं. जब भगवान ने हम सब को एक बनाया है, तो हम भगवान को कैसे बांट सकते हैं."
शिव मंदिर और मस्जिद दोनों को साफ करना, मंदिर में भगवान का श्रृंगार और मस्जिद में अज़ान, ज़हीर ये सारे काम बख़ूबी निभाते हैं. सावन के महीने में शिव की आराधना के लिए आने वालों की भीड़ भी उनकी इस श्रद्धा को देख कर हैरान है.
6 सालों से मंदिर की देखभाल कर रहे ज़हीर अपने घर से करीब 20 किलोमीटर का सफ़र तय करके खंडवा आते हैं. सुबह वो सबसे पहले मंदिर की सफ़ाई करते हैं, और उसके बाद वो मस्जिद का काम करने जाते हैं. इनकी इस लगन और प्रेमभाव ने देश के सामने एक मिसाल कायम की है.
एक तरफ़ तो हम देश का 69वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हम आज भी जाति और धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं. टोपी और भगवा के आगे शायद हमारी सोच रूक गई है, लेकिन मोहम्मद ज़हीर ने इस बंधन को तोड़ कर एक बार फ़िर हम सब से एक सवाल पूछा है. क्या धर्म के नाम पर लड़ने के लिए ही हम एकजुट हो कर आज़ादी के लिए लड़े थे? अपना जवाब कमेंट करके बताएं और इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें.
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