दुनिया के हर इंसान को पैसों का लालच होता है. ज़रूरत से ज़्यादा चाहने का मतलब है कि आपको धन का कहीं न कहीं लालच है. हमारे समाज में अगर बंदे के हाथ में नोट हैं तो उसे लोग इज़्ज़त भरी नज़र से देखते हैं.
लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि जिन नोटों के पीछे हम लोग भागा-दौड़ी कर रहे हैं, वो हमारे आस-पास बीमारियां फैला रहे हैं. जी हां... ‘इंस्टिट्यूट ऑफ़ जियोनॉमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी' यानी 'आईजीआईबी' के वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुतेरे नोट हम तक गंभीर बीमारियां पहुंचाने में अपना योगदान दे रहे हैं. मसलन टीबी, डिसेन्ट्री और अल्सर जैसी गंभीर बीमारियां जिनके नाम से ही लोग घबराते हैं.
दरअसल एक नोट अपनी उम्र में न जाने कितने लोगों के हाथों से गुजरता है. और उन हाथों में अपना घर बनाये तरह-तरह के रोगाणु एक हाथ से दूसरे हाथ पहुंचते हैं ऐसे एक नोट में कई तरह के रोगाणु होते हैं जो एक सही व्यक्ति को बीमार कर सकते हैं.
फ़िलहाल इन नोटों को रोगाणु मुक्त करने की ओर ध्यान दिया जा रहा है. इसे ‘राइबोसोमल आरएनए' तकनीक कहा जाता है. गौरतलब है कि ये सब शोध करने के बाद पता चला है और इस शोध का सरोकार प्रत्येक व्यक्ति से है. शोधकर्ताओ का कहना है कि “ इससे इतना तो पता चलेगा कि पुराने नोटों को कीटाणुरहित करना ज़रूरी है.”
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें