
वीर्य में रक्त पाए जाने की स्थिति को हेमाटोस्पर्मिया कहते हैं। यह हमेशा दिखता नहीं है अतः इसके होने का अंदाज़ा लगाना काफी मुश्किल है। वीर्य में खून मनुष्य के गुप्तांग प्रणाली में होने वाली कई बीमारियों का परिणाम हो सकता है। इस स्थिति में जो भाग प्रभावित होते हैं वो हैं मूत्राशय,अंडकोष,मूत्रमार्ग,अंडकोष के ट्यूब एवं प्रोस्टेट ग्रन्थियां।
कारण
१.प्रोस्टेट की बायोप्सी होने के बाद आमतौर पर वीर्य में रक्त आने की समस्या होती है जो कि ऑपरेशन के ३ से ४ हफ्ते बाद तक रहती है इसी तरह नसबंदी होने के बाद भी करीब १ हफ्ते तक वीर्य में रक्त आने की समस्या रहती है।
२. मनुष्य के गुप्तांगों में होने वाले कई छोटे बड़े संक्रमणों की वजह से भी वीर्य में रक्त की समस्या होती है। गुप्तांगों में विषमता,पथरी या अन्य संक्रमण इनमें प्रमुख हैं।
३. प्रजनन प्रणाली में पोलिप्स होने से भी कई बार वीर्य में खून निकलने की घटनाएं होती हैं। साधारण पॉलिप या प्रोस्टेट,अंडकोष या पुटिका में ट्यूमर होने से भी वीर्य में रक्त निकलता है।
४. मेटास्टैटिक कैंसर की वजह से जो शरीर के विभिन्न भागों में फ़ैल रहा हो और अब गुप्तांगों में स्थित हो गया हो।
५. कभी कभी वीर्यपात के समय बाधा उत्पन्न होने से भी वीर्य में रक्त दिखने की समस्या होती है।
६. प्रोस्टेट या पुटिका में पथरी होने से भी रक्त की समस्या आती है।
७. ये समस्या कुछ यौन सम्बन्धी बीमारियों के फैलने से,जैसे प्रमेह और क्लैमिडिया,भी होती हैं।
८. रेडिएशन की पद्दति,नसबंदी और हैमरॉइड के इंजेक्शन लेने से भी कई बार वीर्य में रक्त की समस्या आ सकती है।
९. यौन अंगों में चोट लगने से जैसे पेडू का टूटना,अंडकोष में चोट,काफी मात्रा में यौन गतिविधियों में सम्मिलित होना तथा वीर्यपात जैसी घटनाओं से भी वीर्य में रक्त आने की समस्या आ सकती है।
१०. प्रजनन प्रणाली के छोटे ट्यूब या द्वार बंद हो जाने पर रक्त वाहिनियां फट जाती हैं और रक्त का स्त्राव होता है।
११. उच्च रक्तचाप,गुर्दे की बीमारी या लियुकेमिया जैसी बीमारियों की वजह से भी वीर्य में रक्त आ सकता है।
लक्षण
वीर्य में रक्त आने से पहले जो लक्षण दिखते हैं उनमें मूत्र विसर्जन में पीड़ा,वीर्यपात के समय पीड़ा,बुखार,पीठ के निचले हिस्से में दर्द और अंडकोष या वीर्यकोष में सूजन प्रमुख हैं।
इस स्थिति का पता डॉक्टर द्वारा मरीज़ का पूरा डॉक्टरी इतिहास देखकर लगाया जाता है जिसमें उनके द्वारा बनाए गए यौन सम्बन्ध,गुप्तांगों की किसी सूजन वगैरह के लिए जांच आदि की जाती है। मूत्र जांच करके किसी भी प्रकार के संक्रमण का पता लगाया जाता है। यौन सम्बन्धी बीमारियों की जाँच भी फायदेमंद है।
डॉक्टरी उपचार
१. अगर वीर्य में रक्त किसी संक्रमण की वजह से आता है तो डॉक्टर मरीज़ को एंटीबायोटिक देंगे।
२. अगर वीर्य में रक्त आने का कारण मूत्राशय की प्रणाली में आई गड़बड़ है तो फिर शल्य क्रिया की आवश्यकता होगी।
३. अगर मूत्राशय में पथरी की वजह से वीर्य में रक्त की समस्या आती है तो इस पथरी को निकालने के लिए भी शल्य क्रिया की आवश्यकता होगी।
४. अगर कैंसर की वजह से रक्त उत्पन्न हो रहा है तो कैंसर का इलाज करवाना होगा।
५. संक्रमण और जलन के लिए डॉक्टरों द्वारा एंटीबायोटिक्स और जलन हटाने वाली दवाइयाँ दी जाती हैं।
६. अन्य बीमारियों जैसे यौन सम्बन्धी रोग,उच्च रक्तचाप तथा गुर्दे की बीमारी का इलाज अलग से किये जाने की आवश्यकता है।
७. अगर किसी शल्य क्रिया के फलस्वरूप आपके वीर्य में रक्त आता है तो इसे इलाज की आवश्यकता नहीं है। यह स्वयं ही ठीक हो जाएगा।
८. प्रोस्टेट का कैंसर मर्दों में किसी भी उम्र में हो सकता है। यह वीर्य में खून आने का मुख्य कारण है अतः इसका इलाज जल्द से जल्द करें।
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