घमंड का जाल जीनिया बारिया आईये हम इसे स्वीकार कर लेते हैं। हममें से अधिकतर खुद पर उससे अधिक घमंड करते हैं जितना हम स्वीकार करना चाहेंगे। लेकिन जब वह प्रशंसा आत्मकामिका या आत्म-अवसाद में बदल जाती है, वह एक समस्या हो जाती है। नैदानिक मनोचिकित्सक सीमा हिंगोरानी मानती हैं कि खुद के विचारों से पूर्वाग्रही होने की अनवरत क्रिया और यह भावना किदुनिया आपके चारों ओर घूमे, अस्वास्थ्यकर होती है। “एक आत्म-अवसादित व्यक्ति वह है जो खुद के बारे में सोचने और बोलने में सहायता नहीं कर सकता है। ये लोग मानते हैं कि वे श्रेष्ठ हैं और दूसरे लोगों के लिए कम सम्मान रखते हैं। लेकिन इस अति-विश्वास के मुखौटे के पीछे एक कमजोर आत्म-सम्मान, अल्पतम आलोचना के प्रति संवेदनशीलता होती है। यह आत्मकामिका व्यक्तित्व अव्यवस्था भी कहलाती है, जब लक्षण गंभीर हो जाते हैं,” हिंगोरानी कहती हैं। निम्न आत्म-मूल्य हम एक संस्कृति में रह रहे हैं जो लोगों को बढ़ते रूप से आत्म-अवसादित बना रहा है। थोड़ा अवसाद प्राकृतिक और अच्छा होता है, तथापि, वह एक समस्या बन जाती है जब व्यक्ति के दैनिक जीवन में हस्तक्षेप करना शुरू करता है। परामर्शदाता और मनोचिकित्सक डॉक्टर दीप्ति एस साह मानती हैं कि जब आत्म-अवसाद के कारण सामाजिक क्षति होती है, वह समय मदद मांगने का होता है। “आत्म-अवसाद का सबसे आम कारण असुरक्षा है। शारीरिक दिखावा आत्म-मूल्य के लिए आलोचनात्मक होता है,” डॉक्टर साह कहती हैं दुखी, आत्म-अवसादित व्यक्ति का जीवन खुद के चारों ओर घूमता है। “यह उनको आत्म-केंद्रित रूप में कार्य करने की ओर ले जाता है। संबंधों में ऐसे व्यक्ति बहुत मांग करनेवाले होते हैं और सामान्यतः खुद के बारे में सोचते हैं। ऐसे लोगों को अपने साझीदार की परवाह संभवतः बहुत कम या फिर बिल्कुल नहीं होती है। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आत्म-अवसादित लक्षणों की एक उच्च प्रतिशतता किशोरों में देखी जाती है।” परिवार और मित्र इससे पीड़ित होते हैं। माता-पिता के लिए इस व्यवहार से निपटना कठिन होता है,” परामर्शदाता मनोचिकित्सक देवांशी संपत-मेहता इसके उबरने के बारे में कहती हैं। आत्म-अवसाद से उबरने के लिए, व्यक्ति को उसे स्वीकार करना पड़ता है। एकबार व्यक्ति जागरूक हो जाता है, इस व्यवहार पर नियंत्रण करने के लिए प्रयास करने लगता है और आपके आसपास के लोगों से सहायता लेता है। चरम मामलों में विशेषज्ञ से सहायता भी बुरा विचार नहीं है। चिकित्सकीय लक्षण- अवसादी बाध्यकारी अव्यवस्था (ओसीडी): बार-बार करनेवाले कार्य जैसे निरंतर हाथ धोना, देखना कि दरवाजा बंद है या नहीं, इत्यादि। -आत्मकामी व्यक्तित्व विकार(नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसॉर्डर: एनपीडी): अति-विश्वास और आत्मप्रशंसा के लक्षण। -शरीर विकृति विकार(बॉडी डिशमॉर्फिक डिसॉर्डर: बीडीडी): शरीर के किसी अंग के बारे में पूर्वाग्रह और जिस तरह वह है उससे नाखुश होना। -द्वीध्रुवीय अवस्था विकार(बाइपोलर मूड डिसॉर्डर: बीएमडी) :शारीरिक शिकायतों की पूर्व-धारणा-सोमाटोफॉर्म विकार: शारीरिक शिकायतों की पूर्व-धारणा। एनोरेक्सिया विकार: व्यक्ति अत्यधिक वजन महसूस करता है और इस कारण खाना कम खाता है। आत्म-अवसाद के लक्षण-आत्म-महत्व की भावना और खतरनाक रूप से आत्मकेंद्रित होना।-लगातार प्रशंसा और सराहना के लालायित, धन, शक्ति और सफलता के बारे में कपोल कल्पना-जिद्दी, घमंडी होना
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