सोने की सही मुद्रा सोते समय सिर को सही जगह पर रखने की दिशा बताती है। हर शोध अपने हिसाब से इस बारे में अपनी राय रखता है। हर मुद्रा के अपने फायदे एवं नुकसान होते हैं और हर व्यक्ति के सोने का तरीका भिन्न होता है,अतः सोने की मुद्रा तय करने का अधिकार पूरी तरह उसी व्यक्ति के हाथ में होता है।
सोने की सही दिशा क्या है ?
किसी भी बिस्तर के सिर एवं पैर की दिशा भाँपने के लिए घर के मालिक विशेषज्ञों की सलाह लेते हैं। अगर सोने की मुद्रा में कोई परेशानी होती है तो इसका सारा दोष वास्तु पर पड़ता है। इससे उस घर के उस कमरे में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। सोने की दिशा का अर्थ है किसी व्यक्ति का किसी ख़ास दिशा में अपने सिर को रखना। आमतौर पर ज़्यादातर लोग अपने सिर को उत्तर या पश्चिम दिशाओं में रखते हैं।
चुम्बकीय प्रभाव
अगर आप भौतिक कारणों की खोज करें तो हमारे गृह में चुम्बकीय ध्रुव है जो उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर फैला हुआ है। यहां सकारात्मक ध्रुव उत्तर में स्थित है और नकारात्मक ध्रुव दक्षिण की दिशा में। स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के अनुसार मनुष्यों में इस तरह के चुम्बकीय ध्रुव होते हैं जिसमें सकारात्मक ध्रुव सिर की ओर होता है और नकारात्मक ध्रुव पैर की ओर। अतः पृथ्वी की दिशा के साथ तुलना करने पर हमारे सिर का काफी महत्त्व है ।
दिशा के सामाजिक आयाम
वैज्ञानिक व्याख्या के अलावा रात में हमारे सिर एवं पैरों की दिशा सामाजिक आयामों को भी प्रभावित करती है। अगर आपके सोने की दिशा सही नहीं है तो इसे लेकर आपके और आपके घरवालों के बीच मतभेद बढ़ सकता है। पृथ्वी के चुम्बकीय प्रभाव की वजह से आपके स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इस वजह से आपके सुबह उठते ही आपको सिरदर्द और सिर भारी होने की समस्या होगी।
सिर रखने की सही दिशा
सिर रखने की दिशाओं में से एक दक्षिण की दिशा है। रात को दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने पर सुबह उठकर आप काफी चुस्त दुरुस्त और तरोताज़ा महसूस करते हैं।
पूर्व दिशा की और सिर करके सोना
१. शुभ
२. दिन में सोने से परहेज करें
३. सिर को दर्द करने वाली किताबें ना पढ़ें।
४. कुछ मन्त्रों का जाप करें
दक्षिण दिशा
१. यह काफी फायदेमंद है।
२. यह जीवन में ताज़गी लाता है।
३. आप इससे प्रफुल्लित अनुभव करते हैं।
उत्तर पश्चिम दिशा
१. काफी खतरनाक
२. खराब सपने आना
३. जीवन में तनाव
४. चिड़चिड़ापन
५. भावनाओं को ना समझना
६. नकारात्मक तरंगें
७. मन की शक्ति में कमी
सोने की मुद्रा के आध्यात्मिक आयाम
आध्यात्मिक विचारों के अनुसार पूर्व पश्चिम की दिशा जिसके अन्तर्गटी पैर पश्चिम की तरफ हों सोने की सबसे अच्छी मुद्रा है।
सोने की मुद्रा के आध्यात्मिक आयाम
आध्यात्मिक विचारों के अनुसार पूर्व पश्चिम की दिशा जिसके अन्तर्गटी पैर पश्चिम की तरफ हों सोने की सबसे अच्छी मुद्रा है।
फायदे
1. कहते हैं कि भगवान के सारे काम पूर्व और पश्चिम की दिशाओं के बीच होते हैं। इस तरफ सोने से हमें काफी अच्छी तरंगें मिलती हैं और इससे हमें अपने कार्य करने की भी शक्ति मिलती है।
2. नाभि के पास स्थित ५ शक्तियां भगवान के कार्यों के फलस्वरूप उत्पन्न हुई तरंगों से जागृत हो जाती हैं। इससे शरीर शुद्ध होता है और हमें शक्ति मिलती है।
3. पूर्व की तरफ सिर करके सोने से सुबह के समय शुद्ध तरंगें हमारे शरीर में पूर्व की दिशा से प्रवेश करती हैं। इससे हमारा शरीर शुद्ध होता है और दिन की अच्छी शुरुआत होती है।
4. सुबह होते ही पूर्व की तरफ से सूरज की ७ तरंगें हमारे शरीर में पूर्व की तरफ से प्रवेश करती हैं। ये ७ तरंगें काफी फायदेमंद होती हैं और ये शरीर के चलायमान होने में सहायता करती है।
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