हम ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ पर सुंदरता का विशेष स्थान है। सुन्दर महिलाओं को काफी आसानी से प्रसिद्धि मिलती। है पर सभी महिलाओं को सुन्दर कहलाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं होता। जब बात किसी महिला की हो रही हो तो उसकी शारीरिक सुंदरता को विशेष महत्त्व दिया जाता है। एक मर्द शादी करने और साथ समय बिताने के लिए हमेशा खूबसूरत महिलाओां की ही आशा करता है। शादी के तमाम विज्ञापनों में भी महिलाओं का सुन्दर होना अनिवार्य होता है। यहाँ तक कि मैगजीन्स, टीवी, सिनेमा और बैनरों में भी आकर्षक लोगों की ही छवि होती है। बड़े बड़े सितारे भी खुद में शारीरिक बदलाव करने हेतु शल्य चिकित्सक के पास जाते हैं। शल्य चिकित्सा की मदद से नाक, गाल और चेहरे के उभारों को दुरूस्त किया जाता है।
महिलाओं के लिए सुंदरता का महत्त्व
भगवान ने महिलाओं को इस तरह बनाया है कि अन्य जीवों की तुलना में वह सुन्दर लगती है। आज के समाज में महिला सुंदरता का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे कई कारक हैं जो एक महिला को खूबसूरत बनाते हैं। चेहरे के भाग जैसे आँखें, नाक, होंठ और यहाँ तक कि त्वचा भी महिलाओं की बेहतरीन सुंदरता बनाए रखने में सहायक होती है। यहाँ तक कि नौकरी के लिए होने वाले इंटरव्यू में भी अच्छी सूरत वाली महिलाओं को पहला मौका दिया जाता है।
हाव भाव में सुंदरता
एक महिला के लिए सिर्फ शारीरिक सुंदरता ही काफी नहीं होती। सुंदरता अच्छे हाव भाव और व्यक्तित्व से भी उभरकर आती है। एक मृदुभाषा महिला का सम्मान समाज में एक कटुभाषी महिला की तुलना में कहीं ज़्यादा होता है। इसी तरह महिलाओं की अन्य शारीरिक खूबियां लोगों को पसंद आने वाली तथा नरम होनी चाहिए। बात करने के समय आने वाली नर्माहट भी एक महिला को सुन्दर और आकर्षक बनाती है। कई लोगों के लिए महिलाओं की शारीरिक सुंदरता ही सब कुछ नहीं होती, बल्कि उनके लिए ये महिलाओं की खूबसूरती का छोटा सा भाग भर होता है। आतंरिक सुंदरता का मोल बाहरी सुंदरता के मुकाबले कहीं ज़्यादा होता है।
सामाजिक सुंदरता
हमारा समाज महिलाओं की आतंरिक सुंदरता को ज़्यादा तरजीह नहीं देता, बल्कि वह एक महिला की बाहरी सुंदरता कोलेकर ज़्यादा मुग्ध रहता है। पर असली सुंदरता, जिसे हमारा समाज देख नहीं पाता, वह हमारी आतंरिक सुंदरता ही होती है। हमारी शारीरिक सुंदरता तो हमेशा से ही अस्थायी रही है। सच्ची सुंदरता हमेशा आतंरिक और बाहरी सुंदरता का एक बेहतरीन मिश्रण होती है।
सम्पूर्ण सुंदरता
हर व्यक्ति के लिए सुंदरता के मायने अलग अलग होते हैं। हर व्यक्ति सच्ची सुंदरता को अपने नज़रिये से देखता है, और अपने हिसाब से वह सही भी होता है। परन्तु जिन महिलाओं में करुणा, नर्माहट, अच्छाई तथा सरलता के गुण होते हैं, उन तारीफ समाज का हर व्यक्ति करता है। हर महिला के लिए शारीरिक सुंदरता ही सब कुछ नहीं होती। जो व्यक्ति एक महिला की असली सुंदरता की कद्र करते हैं, उनके लिए आतंरिक सुंदरता का महत्त्व काफी बड़ा होता है।
प्राकृतिक उपचारों से सुंदरता
सभी महिलाएं जन्म से सुन्दर नहीं होती। एक उम्र के बाद अपनी त्वचा, बाल तथा शरीर के अन्य भागों की देखभाल करना एक अनिवार्य कदम है। एक बार २० वर्ष की आयु पार कर लेने पर नीम की पत्तियों, हल्दी तथा दूध से बने प्राकृतिक उपचारों का प्रयोग करना चाहिए।
दूध और शहद
दूध एक प्राकृतिक क्लींजिंग का माध्यम है जिसकी वजह से आपकी त्वचा साफ़ सुथरी और तरोताज़ा रहती है। इसी तरह शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइसर है जो त्वचा को चमकदार बनाकर उसे नमी देता है। आप या तो इन दोनों पदार्थों का अलग से प्रयोग कर सकते हैं, या फिर दोनों को मिलाकर भी प्रयोग में ला सकते हैं। एक छोटे पात्र में दो चम्मच दूध लें, उसमें एक रुई का फाहा डुबोएं तथा चेहरे पर लगाएं। इसके बाद उस फाहे को उसी पात्र में निचोड़ें। अगर आप एक से ज़्यादा बार इस प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं तो आप पाएंगे कि दूध का रंग सफ़ेद से काला हो गया है। इसका मतलब दूध की वजह से आपके चेहरे की सारी गन्दगी निकल गयी है और वह बिलकुल साफ़ सुथरी हो गयी है।
सादे पानी से अपना चेहरा धो लें। अब अपने चेहरे पर एक चम्मच शहद लगाएं। इसे धीरे धीरे चेहरे पर रगड़ें जब तक कि यह पूरे चेहरे पर ना फ़ैल जाए। यह शुरुआत में चिपचिपा अवश्य लगेगा, परन्तु एक बार चेहरा धो लेने पर आप पाएंगी कि आपकी त्वचा काफी मुलायम और नमी युक्त हो गयी है। आपको १० मिनट तक शहद को अपने चेहरे पर रखना होगा। अब अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें और स्वयं ही चेहरे पर आया फर्क देखें।
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