
वाइन को लम्बे समय से स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं जानकारों ने सेहत के लिए अच्छा माना है। कुछ ताज़ा शोधों ने साबित किया है कि हलकी मात्रा में वाइन पीने से मानव शरीर को फायदा होता है। वाइन के शरीर पर मुख्य फायदे हैं कैविटी से लड़ना,दिमाग और ह्रदय का स्वास्थ्य बनाए रखना और बढ़ती हुई उम्र को कम करना।
स्पेन में वैज्ञानिकों के एक दल ने वाइन में ११ तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया है जिनमें लैक्टोबैसिलस(जो दही में पाया जाता है),गोनोकोकस एवं पेडियोकोकस मुख्य हैं। इन सब बैक्टीरिया को अच्छे बैक्टीरिया या प्रोबिओटिक्स भी कहा जाता है। वाइन में मौजूद ये बैक्टीरिया मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छे होते हैं।
प्रोबिओटिक्स खाने के उत्पादों में मौजूद वो जीवाणु होते हैं जो कि शरीर का फायदा कर सकते हैं अगर इन उत्पादों का सही प्रकार सेवन किया जाए तो। ये प्रोबिओटिक्स मुख्य रूप से शरीर में गट बैक्टीरिया का स्वास्थ्यवर्धक समूह बनाए रखने में फायदेमंद होते हैं। इन बैक्टीरिया में कैंसर को ठीक करने एवं कोलेस्ट्रोल को कम करने के भी गुण होते हैं।
वाइन के बैक्टीरिया शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक कैसे हैं ?
1. शोधकर्ताओं ने परीक्षण करके पाया है कि जो बैक्टीरिया वाइन से निकाल दिए जाते हैं वे मनुष्य की पाचन एवं आँतों से जुडी प्रणाली जैसे वातावरण में ज़िंदा रह सकते हैं,अतः वे मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। वाइन के ये बैक्टीरिया पाचन क्रिया के रस,बाइल एवं लाइसोज़ाइम में मौजूद एंजाइम में भी ज़िंदा रह सकते हैं जो कि आम बैक्टीरिया के शरीर की कोशिकाएं नष्ट कर देती हैं।
2. यह भी पता लगाया गया कि वाइन के बैक्टीरिया मनुष्य के आँतों की दीवारों पर भी चिपके रह सकते हैं। इससे पैथोजन के निकलने में आसानी रहती है जो कि आँतों के हानिकारक बैक्टीरिया होते हैं। वाइन में मौजूद एक बैक्टीरिया आंत की दीवारों पर रहकर इकोली को नष्ट कर सकता है।
3. अ तक सिर्फ यह ज्ञात था कि जिन सर्वश्रेष्ठ भोजन के उत्पादों में प्रोबिओटिक होते हैं वे हैं उबला दूध,दही,पौधों से मिलने वाले व्यंजन जैसे फल,जैतून,अनाज,मटन तथा मछली। कुछ नए शोधों में पाया गया है कि इन सारे पदार्थों में पाया जाने वाला लैक्टिक बैक्टीरिया वाइन में भी होता है।
4. वैज्ञानिकों के अनुसार रोज़ाना कम मात्रा में यानी कि करीब दो गिलास वाइन पीने से शरीर को लाभ होता है। यह दही का विकल्प नहीं है क्योंकि यह दही जैसे फायदे प्रदान नहीं करता है। आप वाइन से प्रोबिओटिक अलग भी कर सकते हैं और अन्य भोजनों में शामिल कर सकते हैं।
5. यह भी पाया गया है कि वाइन इतनी मात्रा में प्रोबिओटिक्स प्रदान नहीं करता है कि वो लाभदायक हों, क्योंकि विन एके ज़्यादा अच्छे बैक्टीरिया सल्फेटिंग की प्रक्रिया के दौरान निकाल दिए जाते हैं। सल्फेटिंग सल्फाइट मिलाने की क्रिया है जिन्हें वाइन बनाने के दौरान बचाव वाली वस्तु या प्रिज़र्वेटीव के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।
6. पॉलीफिनॉल पौधों से मिलने वाले यौगिक पदार्थ होते हैं जो कि वाइन तथा अन्य कई भोजन उत्पादों और पेय पदार्थों जैसे चाय,कॉफ़ी,चॉकलेट एवं नट्स में पाए जाते हैं। लाल अंगूर एवं अन्य कई फल और सब्ज़ियाँ पॉलीफिनॉल के काफी अच्छे स्त्रोत होते हैं। वाइन में मौजूद इस यौगिक पदार्थ का आँतों के बैक्टीरिया पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है और इससे अच्छे गट बैक्टीरिया के निर्माण में मदद मिलती है।
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