मासूम आयलान कुर्दी के मृत शरीर की फ़ोटो जब न्यूज़पेपर, टीवी, सोशल मीडिया पर आने लगी, तब दुनिया की आंख खुली सीरिया की बढ़ती हुई रेफ्यूजी समस्या की ओर. करीब 40 लाख सीरियाई निवासी अपने ही देश से भागने पर मजबूर हो गए हैं. लोग ये जानते तो हैं, लेकिन ये नहीं जानते कि ऐसी विषम परिस्थितियां बन कैसे गयीं?
सच कहें तो सीरिया के हालात बद-से-बद्तर हैं. 2011 में शुरू हुए गृह युद्ध ने 2,50,000 लोगों की जानें ले ली हैं और सीरिया की आधी जनसंख्या को अपने ही घर से बेदखल कर दिया है. हालत ऐसी है की पूरे के पूरे इलाके तबाह कर दिए गए हैं, लोग दयनीय स्थिति में रह रहे हैं और इंसानी जान के कोई मायने ही नहीं हैं. इन 8 तस्वीरों की मदद से हम आपको बताएंगे कि क्यों इस वक़्त दुनिया में सबसे बड़ी समस्या सीरियाई रेफ्यूजियों की है.
सीरियाई गृह युद्ध इतना विनाशकारी इसलिए है क्योंकि वहां घने रिहायशी इलाकों में अत्याधिक हिंसा हो रही है. इस फ़ोटो में आप देख सकते हैं कि कैसे इदलिब शहर में रहने वाला परिवार इस हिंसा से बच कर भाग रहा है.
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ये है डमैस्कस का यारमौक रेफ्यूजी कैंप जहां फ़िलिस्तीनी लोगों का ठिकाना है. इस जगह को 'Living Hell' और 'दुनिया की सबसे बुरी जगह' भी कहा गया है क्योंकि यहां की परिस्थितियां रहने लायक नहीं हैं. 2014 की इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच लोग भोजन और राहत के लिए इंतज़ार कर रहे हैं. इससे पता लगता है कि सीरिया में स्थिति कितनी बुरी है.
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2014 में सीरिया के हम्स शहर के खल्दिये इलाके की ये तस्वीर आपको वहां के विध्वंस की गाथा बताती है. इस शहर को 'क्रांति की राजधानी' कहते हैं क्योंकि 2011 में सरकार विरोधी प्रदर्शन यहीं से शुरू हुए थे. इस इलाके की ऐसी हालत देख कर समझ आता है कि कैसे सीरियाई राष्ट्रपति, बशर अल-असद ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को एक खौफ़नाक गृह युद्ध में बदल दिया.
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असद प्रशासन ने जान-बूझकर और बहुत बड़े पैमाने पर सीरियाई लोगों पर हमला किया है. इस तस्वीर में आप 'बैरल बम' से होने वाले नुकसान को देख सकते हैं, जो अलेप्पो शहर में मई, 2015 में हुआ था. 'बैरल बम' का कंटेनर विस्फ़ोटक बारूद और कई बार धातु से भरा होता है और इसे हेलीकॉप्टर से गिराया जाता है. न्यूयॉर्क टाइम्स के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर, केनेथ रॉथ कहते हैं कि 'विरोधी इलाके में असद द्वारा किये गए बैरल बम के अंधाधुंध उपयोग से समझ आता है कि छुपने के लिए अब कोई जगह नहीं बची है'.
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इस डरावनी हिंसा का परिणाम ये है कि करीब 76 लाख सीरियाई लोग सीरिया में होने के बावजूद भी अपने घर नहीं जा सकते. फ़लस्वरूप इन्हें अमानवीय परिस्तिथियों में कैम्प्स में रहना पड़ता है. ऐसा ही एक कैंप स्थित है टर्की के बॉर्डर पर जिसकी ये तस्वीर 2013 में ली गयी थी.
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विस्थापित सीरियाई लोग, अज़ाज़ शहर के एक NGO के बाहर भोजन का इंतज़ार कर रहे हैं.
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सीरियाई लोगों के लिए सिर्फ़ उनकी सरकार समस्या नहीं है, 2013 से आतंकवादी संगठन 'ISIS' भी सीरिया के रिहायशी इलाकों पर हमला कर रहा है. इस तस्वीर में आप सीरिया के कोबाने शहर का हाल देख रहे हैं जिस पर कुछ समय पहले तक ISIS का कब्ज़ा था. इस साल की शुरुआत में ISIS को वहां से खदेड़ दिया गया, लेकिन जान-माल के नुकसान का अंदाज़ा लगा पाना भी कल्पना के परे है.
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40 लाख में से अधिकतर सीरियाई रेफ्यूजी आज लेबनान और टर्की जैसे पड़ोसी देशों में शरण लिए हुए हैं. इन कैम्पों में हालात इतने बुरे हैं कि रहने-खाने का कोई अता-पता ही नहीं होता. ऐसे ही लेबनान के एक कैंप में रह रहे कुछ बच्चों की तस्वीर.
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इन तस्वीरों को देख कर आप समझ ही गए होंगे कि क्यों दुनिया के लिए इस सीरियाई समस्या का हल निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. लेकिन शायद कुछ मनुष्यों के लिए ये विनाश और बर्बादी भी काफ़ी नहीं है. वो अपने स्वार्थ में इतने लिप्त हो गए हैं कि उन्हें किसी और का दुख नज़र ही नहीं आता.
हंगरी और मैसेडोनिया में रिफ्यूजियों और पुलिस के बीच हिंसा और झड़प की खबरें सामने आई हैं, लेकिन एक विशेष घटना ने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हम जो आपको वीडियो दिखा रहे हैं उसमें सीरियाई रेफ्यूजी पुलिस से बच कर भाग रहे हैं. वहां खड़ी हंगरी की एक कैमरावुमन जान-बूझकर इन असहाय रेफ्यूजियों को लात मार कर गिरा रही है. ऐसा वीभत्स कृत्य कोई इंसान कैसे कर सकता है? खबर ये भी है कि इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस कैमरावुमन को सस्पेंड कर दिया गया.
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गांधी अहिंसा का पाठ पढ़ाते-पढ़ाते ख़त्म हो गए, हर धर्मग्रंथ अहिंसा की बात करता है, देश-विदेश के महान लोग भी ये बता कर चले गए कि किसी भी समस्या का हल हिंसा नहीं है, फिर भी ऐसी घटनाओं को देख कर लगता है कि मनुष्य की महत्वाकांक्षाओं का कोई अंत नहीं है. अगर अंत होगा तो इस धरती के विनाश के साथ ही. आज हमारे शहर बड़े हो गए हैं, लेकिन दिल छोटे. चुनाव आपका है, या तो प्रलय का इंतज़ार करें, या फिर इंसानियत को अपने दिल में थोड़ी पनाह दें.
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