गरीबी एक अभिशाप है. ये हर वो काम करवाती है जिसके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते. क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या जवान... हर किसी की जिंदगी जहन्नुम हो जाती है. ऐसा ही एक वाकया सामने लेकर आए हैं 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के रीडर शैलेंद्र उन्याल. लोदी रोड से गुज़रते हुए उनकी नज़र रोड पर खेलते एक बच्चे पर पड़ी जिसके हाथ में एक पुरानी चप्पल थी और वो उसे अपने मुंह में डालने कि कोशिश कर रहा था, जिसे देख कर उनकी कार में खुद-ब-खुद ब्रेक लग गए. उन्होंने वहां मजदूरी करती एक औरत को इसके बारे में बताया. वो औरत उस बच्चे की मां ही थी. वो वहां आई और उस बच्चे के हाथ से चप्पल छीन कर दूर फ़ेंक वापस अपने काम में लग गई. शैलेंद्र अपनी कार से उतरे और बच्चे को देखने के लिए कदम बढ़ाया. तभी उनकी नज़र उस बच्चे के पैरों पर पड़ी जिसे देख कर वो हैरान रह गए. उस बच्चे के एक पैर में भारी पत्थर बंधा था जिसके कारण वो घिसट भी नहीं सकता था.
उस बच्चे के पैर में पत्थर बंधे होने का कारण उन्हें थोड़ी देर में समझ आया, जब उनकी नज़र वहीं काम कर रहीं उस बच्चे की मां पर पड़ी. लोदी रोड के किनारे फुटपाथ बन रहा था जहां उसकी मां मजदूरी कर रही थी और उसका बच्चा कहीं भाग न जाए इस डर से उसकी मां ने अपने बच्चे के पैरों में भारी पत्थर बांध दिया था.
इस पूरे वाकये से एक गरीब मां का दर्द साफ़ नज़र आ रहा था. उसे अपने बच्चे और अपना पेट भरने के लिए कमाना ज़रूरी है. बच्चे को वो अपने से दूर कहीं छोड़ नही सकती और जहां वो काम करती है वहां बच्चे को सुरक्षित रखने की चिंता भी है. गरीबी आपको कितना कुछ सोचने के लिए मजबूर कर देती है.
हम सब ने ऐसे बच्चों को रोड पर न जाने कितनी बार खेलते देखा होगा और हर बार बस नज़रें घुमा कर अपने रास्ते पर आगे बढ़ गए होंगे. कभी सोचा नहीं होगा कि ऐसा होता क्यों है.
कभी बोझ उठाती मां की गोद में होना
Source : sliceofreallife
कभी मजदूरी के औज़ारों को खिलौना बना लेना
Source : ibtimes
कभी पिता के काम में थोड़ा हाथ बंटा देना
Source : dailymail
सड़क का काम खत्म होने के बाद अपने परिवार के साथ उसी सड़क पर सो जाना
Source : dailymail
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