बीते शुक्रवार को इंडिया के मशहूर म्यूज़िक कंपोज़र आदेश श्रीवास्तव का कैंसर से निधन हो गया. अभी तक फ़िल्मी जगत के साथ-साथ देश भी उनके ग़म से नहीं उभर पाया है. गौरतलब है कि वो कैंसर के अंतिम चरण पर थे. उनका ईलाज कोकिलाबेन हस्पताल से चल रहा था.
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क्या शोहरत कोई मर्ज़ है?
गौर करने लायक ये बात है कि कभी अपनी बुलंदियों की चरम सीमा पर रहे सितारों को हमेशा ये शिकायत रहती है कि मुफ़लिसी या दुख के दिनों में उनका साथ उनके प्रशंसकों से ले कर उनके मित्रगण भी छोड़ जाते हैं. मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार के कथन से स्पष्ट होता है “ शोहरत एक मर्ज़ है और लोग इसके बहुत ज़ल्द आदी होता जाते हैं.”
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क्या अंतिम दिनों में अकेले थे आदेश?
यहां बात साथ से अकेले होने की नहीं हो रही है. दुख में पारिवारिक सांत्वना के साथ-साथ आपको अपने दोस्तों और साथ काम कर रहे लोगों के प्यार की ज़रूरत भी पड़ती है, लेकिन फ़िल्मी जगत में व्यस्त ज़िंदगी के चलते लोग ऐसे नहीं कर पाते, तत्पश्चात जीवन में एक नीरसता का बोध होने लगता है. मसलन रोमेंटिक किंग राजेश खन्ना अपने अंतिम दिनों में इस साथ को तरसते-तरसते दुनिया से अलविदा कह गये.
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सोनू निगम का संदेश आया सामने
अपने ज़िंदगी के अंतिम दिनों में आदेश श्रीवास्तव गायक सोनू निगम के साथ लगातार बने हुए थे. दोनों ने अपने शुरुआती दिनों में साथ काम किया है. दोनों की जड़ें छोटे शहरों से जुड़ी हुई हैं, इसीलिए आसमान की कीमत जानते हैं. नीचे दिखाई गई तस्वीर में सोनू और आदेश श्रीवास्तव के बीच हो रही वाट्सएप्प चैट का स्क्रीनशॉट है. अपने एक साक्षातकार में सोनू निगम कह भी चुके हैं कि “मैं लगभग सभी संगीतकारों और गायकों से वाट्सएप्प पर चैट करता हूं, मसलन लता मंगेश्कर मुझे मेसेज भेजती हैं और प्रतिउत्तर में मैं भी भेजता हूं.”
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अमिताभ बच्चन ने भी ज़ाहिर किया दुख
फेसबुक पर बिग बी ने आदेश श्रीवास्तव जैसे संगीतकार को खोने का दुख जग ज़ाहिर किया. अमिताभ का कहना है कि उन्होंने कभी इस दिन की कल्पना भी नहीं की थी. आज आदेश श्रीवास्तव का चौथा भी है.
ज़िंदगी एक क्षण सामने है और अगले क्षण नहीं. बिलकुल उड़ती धूल की तरह है ज़िंदगी. कभी थम जाती है तो कभी हवाओं में घुल-मिल जाती है. बहुतेरे रंग हैं इसके, लेकिन इन सभी रंगों के बावजूद भी जो शख़्स ख़ुद को तड़क-भड़क से अलग बनाये रखता है, वो ही इंसान कहलाता है... एक संवेदनशील इंसान. दुख कभी भी, किसी के भी दरवाजे पर दस्तक दे सकता है. उस दुखी इंसान से दूरी न बनायें क्योंकि हो सकता है आपकी सांत्वना उसे सुख के प्रति प्रेरित कर दे.
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