हाल ही में बीयर बार और बिल्डर सचिन दत्ता को पहले निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया जाता है और फ़िर मीडिया में उनकी सच्चाई सामने आने के बाद उन्हें उस पद से हटा दिया जाता है.
Source: abpnews
क्या महामंडलेश्वर बिकाऊ है?
महामंडलेश्वर की उपाधि पाने के लिए सचिन से सच्चिदानंद बने इस शख़्स ने कहीं इस पद को ख़रीद तो नहीं लिया? ऐसा सवाल इनकी सच्चाई सामने आने के बाद हर एक शख़्स के ज़हन में आना वाजिब है. टीवी चैनलों को अपनी सफ़ाई में सचिन कह चुके हैं कि “आज के ज़माने में अगर स्वयं भगवान वाल्मीकि भी होते, तो मीडिया उनको भी न छोड़ता”.
Source: bharatabharati
राधे मां भी हैं लाइन में
हाल ही में चर्चित रही राधे मां को पहले जूना अखाड़े में महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी, लेकिन विवादों में रहने के कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हालांकि चार साधुओं की बनी एक समिति ने उन्हें सारे आरोपों से मुक्त कर कुंभ मेले में शामिल होने का रास्ता साफ़ कर दिया.
Source: aajtak
नाशिक में क्यों करते हैं अलग-अलग स्नान?
8वीं सदी के दौरान आदि शंकराचार्य ने कुंभ मेले में शामिल होने के लिए 13 अखाड़े बनाये थे. गौरतलब है कि आज तक वही 13 अखाड़े ज्यों के त्यों बरकरार हैं. अन्य सभी कुंभ मेलों में सभी 13 अखाड़े एक साथ शाही स्नान की प्रथा का पालन करते हैं, जबकि नाशिक कुंभ के दौरान वैष्णव अखाड़े नाशिक में और शैव अखाड़े को त्रयंबकेश्वर जा कर शाही स्नान करना पड़ता है. ये प्रथा 1772 से ही बरकरार है.
Source: mahakumbhutsav
अपने अंहकार की देनी पड़ती है कुर्बानी
कुंभ मेले में 13 अखाड़ों के अलग-अलग महामंडलेश्वर होते हैं. एक सतत् प्रक्रिया एवं व्यवस्था के माध्यम से उनका चुनाव किया जाता है. अखाड़े का महामंडलेश्वर बनना कोई आसान काम नहीं है. उसके लिए उस शख़्स को वैराग्य से मोह, धन के लालच से दूरी, मन की शांति का अहसास और सांसरिक सुविधाओं की कुर्बानी देनी पड़ती है. तभी जा कर उसे महामंडलेश्वर की उपाधि से नवाज़ा जाता है.
Source: konekrusoskronos
कब-कब है शाही स्नान
नाशिक में हो रहे अर्धकुंभ का एक शाही स्नान 29 अगस्त को हो चुका है. अब 13 सितंबर और 18 सितंबर को शाही स्नान होना बाकी है. जबकि त्रयंबकेश्वर में 25 सितंबर को शाही स्नान किया जायेगा.
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें