कहते हैं कि जीने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान अनिवार्य शर्तों में से एक है. कभी नेताओं की लड़खड़ाती ज़ुबान से निकलता है कि “पांच रुपये में भर पेट खाना खाया जा सकता है.” लेकिन रोटी की कीमत तो जनाब वही पेट जानता है जिसको उसकी भूख होती है.
आज हम आपको एक ऐसे शख़्स के बारे में बतायेंगे जो सिर्फ़ एक रुपये में भर पेट खाना देने का काम करते हैं. बात तमिलनाडु के एक अस्पताल की है. जहां वी. वेंकटरमन सिर्फ़ एक रुपये में मरीजों को भर पेट भोजन उपलब्ध करवाते हैं.
तमिलनाडु के ऐरोड जनरल होस्पिटल में “श्री ए.एम.वी होमली मेस” चलाने वाले वी. वेंकटरमन की ज़िंदगी में एक नया मोड़ साल 2008 में तब आया जब एक महिला उनके मेस में इडली लेने आई. उन्होंने उसे इडली के साथ डोसा लेने का सुझाव दिया लेकिन महिला के पास इतने पैसे नहीं थे. बात वेंकटरमन के दिल पर लगी. बहुत सोच विचार करने के बाद उन्होंने महिला को उन्हीं पैसों में डोसा भी दे दिया.
Source: thelogicalindian
उसी दिन से वो लोगों को कम पैसों में भर पेट खाना खिलाने के निर्णय ले चुके थे. शुरुआत में अस्पताल जाकर वो एक रुपये वाले 20 टोकन बांटा करते थे लेकिन ज़रुरतमंदों की कगार बढ़ने के साथ-साथ उन्होंने टोकनों की संख्या भी बढ़ानी शुरू कर दी. अब सोचने वाली बात ये है कि इतने कम रुपये में वो लोगों को खाना कैसे खिला सकते हैं मसलन चावल, दाल, डोसा, इडली और कुछ अन्य पौष्टिक आहार. जब वेंकट से इस बारे में पूछा तो उनका कहना था कि “अब जो कार्य मैं शुरू कर चुका हूं उसे स्थगित करना मेरे बस में नहीं है.”
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