किसी भी माता-पिता के लिए सबसे बड़ा दुख होता है अपने बच्चे को हमेशा के लिए खो देना. कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को कभी भुला नहीं सकते. लेकिन हम ये कहें कि दुनिया में एक जनजाति ऐसी भी है जिनको उनके जुड़वां बच्चों की मौत के बाद एक अजीब परंपरा पूरी जिंदगी निभानी पड़ती है.
वो अपने मरे हुए जुड़वां बच्चों की लकड़ी की गुड़िया बनवाते हैं और पूरी ज़िंदगी उनकी जिंदा बच्चों की तरह देख भाल करते हैं. जैसे बच्चों को माता-पिता अपने सीने से लगा कर रखते हैं वैसे ही इन लोगों को पुतलों को रखना पड़ता है.
अफ्रिकी देश बेनिन में रहने वाली फॉन जनजाति की ये परंपरा इतने में ही नहीं रूकती. आप ये जान कर हैरान हो जाएंगे कि लकड़ी की बनी इन गुड़ियों को ये लोग खाना खिलाते हैं, नहलाते हैं और हर वो काम करते हैं जो एक ज़िंदा बच्चे के साथ किया जाता है. यहां तक कि इन लकड़ियों के बने पुतलों को ये लोग स्कूल भी भेजते हैं.
इस परंपरा को सिर्फ़ जुड़वां बच्चों की मौत के बाद ही निभाना पड़ता है
ये परंपरा बच्चे के माता-पिता को पूरी ज़िंदगी निभानी पड़ती है
अफ्रिकी जनजाति फॉन की इस अजीब परंपरा को सामने लाने वाले हैं फ्रेंच फ़ोटोग्राफ़र एरिक. उन्होंने इस परंपरा पर एक डॉक्युमेंट्री भी बनाई है.
वूदू धर्म को मानने वाली इस जनजाति में जुड़वां बच्चों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है. यहां हर 20वां बच्चा जुड़वां होता है.
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