हम हमेशा से ही सुनते आए हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, मगर इस परिभाषा में यदि आज के हिसाब से परिवर्तन करने की गुंजाइश हो तो सामाजिक शब्द को व्यावसायिक से बदला जा सकता है. आख़िर मनुष्य रोते-बिलखते मज़बूर लोगों के चेहरों में भी तो उसका नफा-नुकसान देखने लगता है. और इतना ही नहीं उसने लोगों के नींद में भी व्यवसाय को घुसा दिया है. यहां “Cities Of Sleep” फ़िल्म के मार्फ़त फ़िल्म डिविजन के प्रोडक्शन में शौनक सेन ने दिल्ली के नींद माफियाओं को बेनकाब करने की कोशिश की है.
इस फ़िल्म के ट्रेलर ने और विशेष तौर पर अंतिम लाइन ने तो मुझे स्तब्ध कर दिया है. आप भी ज़रूर देखें...
इस फ़िल्म के ट्रेलर ने और विशेष तौर पर अंतिम लाइन ने तो मुझे स्तब्ध कर दिया है. आप भी ज़रूर देखें...
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